सरकार ने बजट में उठाए कई व्यवहारिक कदम
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वित्तीय सुधार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बजट में व्यय नीति की समीक्षा का प्रस्ताव रखा है और यूरिया नीति तैयार करने की घोषणा की है।
सरकार ने व्यय प्रबंधन आयोग के गठन का भी ऐलान किया है। यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि, आयोग को नए सिरे से पड़ताल शुरू करने और उपाय सुझाने में समय बर्बाद करने की बजाय कालांतर में विशेषज्ञों और उच्च स्तरीय इकाइयों द्वारा दिए गए प्रस्तावों की समीक्षा करनी चाहिए और स्वीकार्य और व्यावहारिक सुधारों को प्रभावी बनाने का खाका तैयार करना चाहिए।
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण फंड बनाने की घोषणा की है। इसमें सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस फंड का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से हो और इसका लाभ किसानों तक पहुंचे, न कि बिचौलियों इससे लाभान्वित हो जाएं।
इसके अलावा सरकार ने देश में भंडारण क्षमता बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई है और बजट में इसके लिए प्रावधान किए हैं। इसको प्राथमिकता के आधार पर लेना होगा और शुरुआत में प्रमुख जगहों पर भंडारगृह बनाने का रोडमैप तैयार करना चाहिए। इसके बाद इनका विस्तार अन्य क्षेत्रों में करना चाहिए।
केंद्र सरकार ने एपीएमसी में सुधार और भारतीय खाद्य निगम के पुनर्गठन की बात कही है। इसके लिए उसे राज्यों के साथ मिलकर काम करना होगा। सरकार ने तंबाकू जैसे कुछ उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी की है। निश्चित रूप से उपभोक्ताओं के हित को देखते हुए यह एक स्वागत योग्य कदम है।
कर नीति में स्पष्टता और स्थिरता के संबंध में सरकार ने सामान्य तौर पर पुरानी तारीख से प्रभावी (रेट्रोस्पेक्टिव) कर कानूनों का प्रावधान नहीं किया है और सभी रेट्रोस्पेक्टिव मामलों की जांच एक उच्च स्तरीय आयोग से कराने की बात कही है। आयोग को एक निश्चित समय सीमा में काम करना है और अपनी सिफारिशें देनी हैं।
सरकार ने जीएसटी को तत्काल प्रभावी बनाने और लंबित मामलों को सुलझाने की बात कही है, जो कि एक स्वागत योग्य कदम है।