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बिजली में सुधार के तेज कदम उठाएगी सरकार

Sat, 21 Jun 2014 03:15 AM IST
Updated Sat, 21 Jun 2014 03:15 AM IST
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government take action for electrification

बिजली क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए मोदी सरकार सभी बुनियादी मुद्दों को हल करने की कवायद में जुट गई है। इसी के तहत शुक्रवार को ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल ने निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के प्रमुखों के साथ हुई बैठक में आश्वासन दिया है, कि सरकार कोयले की आपूर्ति, कर्ज की उपलब्धता और पर्यावरण मंजूरी जैसे सभी अहम मुद्दों को सुलझाएगी।

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कोयले की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कोल इंडिया को ऊर्जा मंत्री ने अतिरिक्त उत्पादन करने और ई-नीलामी में कोयले की मात्रा कम इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है। इसके अलावा कोयले की आपूर्ति तुरंत जरूरत वाले प्रोजेक्ट को तरजीह देने के भी निर्देश दिए हैं। बैठक में राज्य सरकारों, कोल इंडिया और एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी भी शमिल हुए।
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हल निकालने में जुटी सरकार

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एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस वार्ता में गोयल ने कहा कि बिजली की समस्या लंबी अवधि से सही नीतियों को अमल में न लाने का परिणाम है।

हमें सब मुद्दों पर पारदर्शी और उचित कवायद करनी होगी। इसमें कोयले की आपूर्ति से लेकर, प्रोजेक्ट क्लीयरेंस, कर्ज की उपलब्धता, बिजली के ट्रांसमिशन और वितरण को मजबूत जैसे कदम उठाए जाएंगे। एसोसिएशन की बैठक में रिलायंस पॉवर के चेयरमैन अनिल अंबानी, एस्सार समूह के प्रशांत रुइया, जिंदल पॉवर के चेयरमैन नवीन जिंदल, वेलस्पन एनर्जी के एमडी विनीत मित्तल जैसे उद्योगपति शामिल थे।

गोयल के अनुसार कर्ज की उपलब्धता को लेकर वह देश के प्रमुख बैंकों के साथ सोमवार को बैठक करेंगे। इसके अलावा पर्यावरण मंजूरी जैसे मुद्दों पर भी अलग से बैठक की जाएगी।

गोयल ने कहा कि तात्कालिक समाधान के लिए उन्होंने कोल इंडिया से मौजूदा खानों में अतिरिक्त कोयले का उत्पादन करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा कंपनी को ई-नीलामी के दौरान कोयले की कम मात्रा रखने को कहा है, जिससे कि कोयले की उपलब्धता बढ़ सके। कोल इंडिया अभी अपने कुल उत्पादन का 7 फीसदी हिस्सा ई-नीलामी के रूप में इस्तेमाल करती है।

कोयले की आपूर्ति बड़ी समस्या

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देश में 60 फीसदी बिजली का उत्पादन कोयले से होता है। नई खदानों का लाइसेंस न मिलने के कारण कोल इंडिया अपने जरूरत के अनुसार कोयले का उत्पादन नहीं कर पाई है।

कंपनी ने साल 2013-14 में अपने लक्ष्य से 1.95 करोड़ टन उत्पादन किया था। इसमें 1.25 करोड़ टन उत्पादन पर्यावरण मंजूरी न मिलने से प्रभावित हुआ था। इसके अलावा आयातित कोयला महंगा होने से कंपनियां कोयले को खरीद नहीं रही हैं। देश में इस समय करीब 2.45 लाख मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है, लेकिन उत्पादन 1.55 लाख मेगावाट के करीब ही हो रहा है।

वित्त मंत्री से भी मिले बिजली उत्पादक
ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से मिलने के बाद बिजली कंपनियों के प्रमुख वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी मिले। कंपनियों ने वित्त मंत्री से आगामी बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहतर कदम उठाने की जरूरत जताई है। साथ ही बैठक के दौरान कोयले की आपूर्ति, अटके प्रोजेक्ट, पर्यावरण मंजूरी जैसे मुद्दों को वित्त मंत्री के सामने कंपनियों ने रखा है।

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