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कालेधन को स्वदेश लाने के लिए माफी स्कीम

Sat, 21 Jun 2014 03:29 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 21 Jun 2014 03:29 AM IST
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government should float amnesty scheme to get back black money

उद्योग संगठन एसोचैम ने विदेशों में पडे़ भारतीयों के करीब 20 खरब डॉलर यानी 1.20 लाख करोड़ रुपये को स्वदेश लाने के लिए सरकार को छह महीने तक माफी स्कीम लागू करने और इस दौरान घोषित की जाने वाली राशि पर 40 फीसदी कर लगाने का सुझाव दिया है। कालेधन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया गया है।

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एसोचैम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील कनोरिया ने शुक्रवार को इस संबंध में एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि विदेशों में पडे़ कालेधन का सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सिर्फ अनुमान लगाया जा रहा है। विदेशों में करीब 20 खरब डॉलर अर्थात 1.20 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ कालाधन ही नहीं है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट की एक प्रति एसआईटी को भी सौंपी जाएगी।
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उन्होंने कहा कि संगठन ने माफी स्कीम के तहत स्वदेश लाई जाने वाली राशि पर 40 फीसदी कर लगाने और उस राशि का 10 फीसदी हिस्सा बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश करने की अनिवार्यता की सिफारिश की है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सोना का खपत वाला दुनिया का अग्रणी देश है। भारत में मध्यम वर्ग में यह आम धारणा है कि बचत को सोने के रूप में सुरक्षित रखा जाना चाहिए और कालेधन पर रोक लगाने में यह बहुत बड़ी बाधा है। इसके साथ ही उसमें आम लोगों को अपनी बचत को वैधानिक एवं वित्तीय तरीके से सुरक्षित रखने के प्रति भी शिक्षित किया जाने की आवश्यकता बताई है।

राजनीतिक दलों के चंदे में आए पूरी पारदर्शिता
रिपोर्ट में कालेधन के स्रोत पर रोक लगाने के उपाय भी सुझाए गए हैं। इसमें राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पूरी पारदर्शिता लाने, राशि जुटाने और उसके व्यय के सभी स्रोतों का खुलासा करना आदि भी शामिल है। कालेधन के स्रोत पर रोक लगाने के तहत एसोचैम ने पूरे देश में तीन फीसदी की दर से स्टांप शुल्क रखने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक वर्ष सर्किल रेट निर्धारित किया जाना चाहिए और यह दर बाजार मूल्य से अनुरूप होनी चाहिए।

कई देशों में लागू हो चुकी है माफी योजना
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की स्कीम अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे दुनिया के 20 देशों में शुरू की गई थी और उसका परिणाम उत्साहजनक रहा था। अमेरिका में शुरू की गई इसी तरह की माफी योजना का 14,700 से अधिक करदाताओं ने लाभ उठाया। जर्मनी में 20 हजार करदाताओं ने इस तरह की योजना का लाभ उठाते हुए सरकार को चार अरब डॉलर का अतिरिक्त राजस्व दिया।


हवाला भी है एक समस्या
एसोचैम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हवाला भी एक समस्या है। विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी से अवैध एवं समानांतर लेनदेन व्यवस्था भी बनी है जो तस्करी की तरह का गंभीर खतरा है। विदेशों से डॉलर भारत आना चाहिए जबकि इस प्रक्रिया में विदेशों में चल रहे अवैध खातों में उसे हस्तांतरित कर दिया जाता है।

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