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चालू वित्त वर्ष में 5.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

Sat, 20 Dec 2014 09:20 AM IST
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया Updated Sat, 20 Dec 2014 09:20 AM IST
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 government pegs economic growth at 5.5 per cent.

मोदी सरकार ने यह स्वीकार किया है कि निवेश की धारणा अभी कमजोर है और इसमें तेजी आना बाकी है।

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राजस्व वृद्धि की रफ्तार भी अनुमान से कम है। ऐसे में चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 5.5 फीसदी रहेगी।

सरकार ने शुक्रवार को जारी मध्य वार्षिक आर्थिक समीक्षा में यह माना कि बड़े आर्थिक सुधारों और देश में कारोबार करने के माहौल को सही आकार लेने में अभी वक्त लगेगा।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में विकास दर 5.5 फीसदी थी। संसद में पेश की गई मध्य वार्षिक समीक्षा में कहा गया है कि पिछले कई सालों से विकास दर में सुस्ती का दौर था, अब यह इससे बाहर निकलती दिखाई दे रही है।
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निवेश और विकास में टिकाऊ रिकवरी प्रगति पर है। नकारात्मक लाभ और ऊंचे कर्ज के चलते कॉरपोरेट सेक्टर कमजोर हुआ है और इससे निजी निवेश को लेकर अनिश्चितता की स्थिति उपजी है।
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यही वजह रही कि इंफ्रास्ट्रक्चर में पीपीपी मॉडल की योजनाएं ठप पड़ी हैं। भारतीय परिस्थितियों के लिहाज से इस स्थिति की ‘बैलेंस सीट सिंड्रोम’ के रूप में चिह्नित किया जा सकता है।


समीक्षा में कहा गया है कि विकास दर में रिकवरी के लिए सरकारी निवेश की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी और निजी निवेश को भी रफ्तार देनी पड़ेगी। विकास दर को रफ्तार देने के लिए विभिन्न सेक्टरों की वित्तीय नीतियों को आगे बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।

इसके साथ इसमें निवेश को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय नीतियों में संभावनाएं बनानी होंगी। इसी तरह, वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2014-15 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 5.5 फीसदी रहने का आकलन व्यक्त किया है।

बीते लगातार दो वर्षों तक आर्थिक विकास दर पांच फीसदी के दायरे में रही थी। यह आकलन ऐसे समय में आया है जब औद्योगिक उत्पादन अक्तूबर में तीन साल के निचले स्तर 4.2 फीसदी पर आ गया है।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में अर्थव्यवस्था 5.5 फीसदी की दर से बढ़ी थी और इसलिए यह आकलन दर्शाता है कि सरकार दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था के अधिक तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद नहीं करती है। वास्तव में यह आकलन भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुरूप ही है।

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में विकास दर 5.4 से 5.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। समीक्षा में खुदरा महंगाई के अगली पांच तिमाही के दौरान 5.1 से 5.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया गया है।

रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई दर जनवरी 2015 तक 8 फीसदी और 2015 तक 6 फीसदी रहने का लक्ष्य तय किया है। समीक्षा में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब दो फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। इसमें कहा गया है कि तेल कीमतों में गिरावट को सोने के आयात में आए उछाल से धक्का लगेगा।


नवंबर में सोना आयात 500 फीसदी से अधिक बढ़ा है। सरकार का यह भी कहना है कि मार्च 2015 तक ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसके अलावा पूरे साल कर संग्रह की रफ्तार अनुमान से कम रही है और इसलिए चालू वित्त वर्ष के लिए राजस्व का अनुमान अधिक आशावादी है।

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