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अब साइबर क्राइम से मुकाबला करेगा सरकार का यह हथियार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2013 08:34 PM IST
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लगातार बढ़ रहे साइबर क्राइम से मुकाबला करने के लिए सरकार ने नेशनल साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी 2013 की घोषणा की है।
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पॉलिसी के तहत साइबर खतरों से निपटने के लिए विभिन्न स्तर पर अलग-अलग निकायों का गठन किया जाएगा। देश भर के साइबर सिक्योरिटी से जुड़े मामलों के संयोजन का काम नेशनल नोडल एजेंसी करेगी।
सामरिक महत्व के क्षेत्रों जैसे एयर कंट्रोल, परमाणु शक्ति और अंतरिक्ष कार्यक्रम आदि पर साइबर हमलों को रोकने के लिए नेशनल क्रिटिकल इनफॉरमेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) का गठन किया जाएगा।
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यह निकाय चौबीसों घंटे काम करने वाले सेंटर के तौर पर काम करेगा और यह एनटीआरओ के अधीन होगा। इसके अलावा मौजूदा एजेंसी सीईआरटी सभी पब्लिक और प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर को संभालेगी।
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संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत कुछ ऐसे चुनिंदा देशों में से है, जहां साइबर पॉलिसी है। उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को लागू करना एक जटिल कार्य है और अब हम इस पर विस्तृत एक्शन प्लान के साथ काम करेंगे।
सिब्बल ने कहा कि सामरिक महत्व के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे एयर डिफेंस सिस्टम, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, न्यूक्लियर प्लांट, टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम आदि को सुरक्षित करना है, अन्यथा इसे आर्थिक अस्थिरता आ सकती है। साइबर पॉलिसी देश-विदेश, कॉरपोरेट घरानों और आतंकवादियों से होने वाले संभावित साइबर खतरों से निपटने के लिए जरूरी है।
सरकार भविष्य में साइबर वॉर के खतरों को देखते हुए पहले से ही तैयार होना चाहती है। सिब्बल ने कहा कि साइबर वॉर व्यक्ति विशेष, समाज के कुछ वर्ग, बिजनेसमैन, आतंकी, ड्रग माफियाओं या कहीं और से भी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि साइबर हमलों को लेकर किसी देश की तरफ उंगली भी नहीं उठाई जा सकती है क्योंकि साइबरस्पेस में हमलों का स्रोत ढूंढ़ना मुश्किल है। इसलिए, हमें वैश्विक पैमाने तय करने होंगे क्योंकि ऐसा कोई रास्ता नहीं है कि भारत को ध्यान में रखकर पॉलिसी तैयार की जाए जो कि दुनिया भर से न जुड़ी हो।
5 लाख पेशेवर होंगे तैयार
साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी में 5 लाख साइबर पेशेवरों को पांच साल में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। जिस तेजी के साथ इंटरनेट बढ़ेगा, हमलों की संभावना भी उतनी ही ज्यादा होगी। लिहाजा, इनसे निपटने के लिए साइबर पेशेवरों की सख्त जरूरत होगी। इसके अलावा पॉलिसी में 13 अन्य अहम उद्देश्य तय किए गए हैं। इनमें से एक उद्देश्य के तहत साइबर सिक्योरिटी पैमानों का सही पालन करने पर वित्तीय मदद का भी उल्लेख पॉलिसी में किया गया है।
इंटनेट का बढ़ता दायरा खतरे की घंटी
जिस तेजी के साथ इंटरनेट का दायर बढ़ रहा है, उसी रफ्तार के साथ साइबर क्राइम का भी संकट बढ़ रहा है। प्रमुख सेवाओं जैसे बैंकिंग, टेलीकॉम, एयरलाइंस, एनर्जी आदि निजी हाथों में है। लिहाजा, इन क्षेत्रों पर साइबर अटैक की संभावना ज्यादा रहती है। इसे देखते हुए एक सख्त साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी की भारत को जरूरत है और लांच हुई पॉलिसी इसी दिशा में काम करेगी।
भारत में इंटरनेट का दायरा
:- 80 करोड़ एक्टिव मोबाइल ग्राहक
:- 16 करोड़ इंटरनेट ग्राहक
:- 8 करोड़ सोशल नेटवर्किंग पर मौजूद
:- 60 करोड़ 2020 तक ब्रॉडबैंड ग्राहक