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अब बीमा और पेंशन में एफडीआई की तैयारी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 22 Sep 2012 02:17 PM IST
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यूपीए-दो के आर्थिक सुधार के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने बीमा और पेंशन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट में लाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यह प्रस्ताव मंगलवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है। हालांकि इस प्रस्ताव पर सहयोगी दलों की सहमति लेना सरकार के लिए अनिवार्य है। इसलिए केंद्र सरकार बीमा और पेंशन क्षेत्र में एफडीआई के लाभ को समझाते हुए एक ब्लू प्रिंट भी तैयार कर रही है। इस ब्लू प्रिंट के जरिए सरकार एफडीआई के प्रस्ताव पर अपने प्रमुख सहयोगी दलों की सहमति लेने की कोशिश करेगी।
तृणमूल कांग्रेस के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद लंबे समय से अधर में लटके पेंशन और बीमा क्षेत्र में एफडीआई के प्रस्ताव को पारित कराना सरकार के लिए पहले से आसान हो गया है। प्रमुख सहयोगी दल सपा और बसपा को बीमा और पेंशन क्षेत्र में एफडीआई के लाभ को समझाने के लिए यह ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है। परदे के पीछे शुरू हुई इस कसरत से सहयोगी दलों की चिंताएं दूर करने में जुटी केंद्र सरकार इस ब्लूप्रिंट को दोनों पार्टियों के समक्ष अगले दो दिनों में रखेगी।
पेंशन और बीमा में एफडीआई लाने से पहले सरकार सहयोगी दलों को यह भी समझाना चाहती है कि मनरेगा समेत तमाम सामाजिक योजनाओं को विस्तार देने के लिए देश में निवेश का बढ़ाना जरूरी है। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत तमाम राज्य सरकारों को केंद्र की ओर से इसके लिए अतिरिक्त मदद इसलिए नहीं दिया जा रहा क्योंकि उनके पास सामाजिक योजनाओं में खर्च के लिए अतिरिक्त रकम की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में विदेशी निवेश का रास्ता उनके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि सरकार का यह प्रस्ताव नया नहीं है।
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पिछले वर्ष दिसंबर में संसद की स्थायी समिति ने एफडीआई के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। अगर केंद्र के इन दलीलों से सहयोगी दल सहमत हो जाते हैं, तो बीमा और पेंशन में एफडीआई को लाने के प्रस्ताव पर मंगलवार को मुहर लग जाएगी। फिलहाल बीमा क्षेत्र में एफडीआई कैप 26 फीसदी का है, जिसे सरकार बढ़ाकर 49 फीसदी करना चाहती है। जबकि पेंशन में एफडीआई को लेकर भी इतना ही कैप लगाने का प्रस्ताव है।
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तृणमूल कांग्रेस के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद लंबे समय से अधर में लटके पेंशन और बीमा क्षेत्र में एफडीआई के प्रस्ताव को पारित कराना सरकार के लिए पहले से आसान हो गया है। प्रमुख सहयोगी दल सपा और बसपा को बीमा और पेंशन क्षेत्र में एफडीआई के लाभ को समझाने के लिए यह ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है। परदे के पीछे शुरू हुई इस कसरत से सहयोगी दलों की चिंताएं दूर करने में जुटी केंद्र सरकार इस ब्लूप्रिंट को दोनों पार्टियों के समक्ष अगले दो दिनों में रखेगी।
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पेंशन और बीमा में एफडीआई लाने से पहले सरकार सहयोगी दलों को यह भी समझाना चाहती है कि मनरेगा समेत तमाम सामाजिक योजनाओं को विस्तार देने के लिए देश में निवेश का बढ़ाना जरूरी है। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत तमाम राज्य सरकारों को केंद्र की ओर से इसके लिए अतिरिक्त मदद इसलिए नहीं दिया जा रहा क्योंकि उनके पास सामाजिक योजनाओं में खर्च के लिए अतिरिक्त रकम की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में विदेशी निवेश का रास्ता उनके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि सरकार का यह प्रस्ताव नया नहीं है।
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पिछले वर्ष दिसंबर में संसद की स्थायी समिति ने एफडीआई के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। अगर केंद्र के इन दलीलों से सहयोगी दल सहमत हो जाते हैं, तो बीमा और पेंशन में एफडीआई को लाने के प्रस्ताव पर मंगलवार को मुहर लग जाएगी। फिलहाल बीमा क्षेत्र में एफडीआई कैप 26 फीसदी का है, जिसे सरकार बढ़ाकर 49 फीसदी करना चाहती है। जबकि पेंशन में एफडीआई को लेकर भी इतना ही कैप लगाने का प्रस्ताव है।