'छोटी बचत पर दरों में कटौती को लेकर सतर्क है सरकार'
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा है कि केंद्र सरकार छोटी बचत पर ब्याज दर में कटौती सतर्कता के साथ करेगी, जिससे सेवानिवृत्ति कर्मचारियों जैसे इससे प्रभावित होने वाले तबके के हित सुरक्षित रहें।
इसके साथ वित्त मंत्री ने विश्वास जताया है कि सातवां वेतन आयोग राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जैसे राजमार्ग को वित्तपोषित करने के लिए पेट्रोल और डीजल पर तीन गुने से अधिक अधिभार का इस्तेमाल कर रही है लेकिन वेतन और पेंशन में ज्यादा रकम जाने से सामाजिक क्षेत्र पर खर्च बढ़ाने के लिए वित्त की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होगा।
एक समारोह में उन्होंने कहा कि काफी लोग छोटी बचत स्कीमों पर निर्भर करते हैं। आर्थिक सिद्धांतों के अलावा हमें चुनी हुई सरकार के तौर पर इस पर ध्यान देना होगा।
कुछ उत्पादों पर ऊंची दर से टैक्स जरूरी
बैंकों ने आरबीआई द्वारा 2009 के बाद से दरों में की गई सबसे बड़ी कटौती का
मात्र 20 फीसदी ही लागू किया है। बैंकों को छोटी बचतों जैसे पीपीएफ और
पोस्ट ऑफिस जमाओं की तुलना में प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर कमजोर होने का डर
है।
ज्यादातर छोटी जमा स्कीमों पर 8.75 फीसदी ब्याज मिल रहा है
जबकि भारतीय स्टेट बैंक जमा पर 7.5 फीसदी ब्याज दे रहा है। बैंकों को अगर
कर्ज की दरों में कटौती करनी है तो उन्होंने जमा दरों को भी नीचे लाना
होगा।
जेटली ने उम्मीद जताई कि मौजूदा वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 7.5
फीसदी की दर से बढ़ेगी और यह दर आने वाले वर्षों में और तेज होगी। इसके
परिणामस्वरूप सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या
संविधान में उल्लेख कर गुड्स एंड सर्विस टैक्स की दर की सीमा तय करना संभव
है, जेटली ने कहा कि यह सही नहीं होगा क्योंकि कुछ उत्पादों पर ऊंची दर से
टैक्स लगाए जाने की जरूरत है।