सरकार ऊंची टैक्स दरों के खिलाफ : जेटली
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नरेंद्र मोदी सरकार ऊंची टैक्स दरों के पक्ष में नहीं है लेकिन वह एक साथ उद्योग और गरीब समर्थक होने में यकीन करती है। सरकार चाहती है कि देश में कम विकास और ऊंची महंगाई दर का दौर बदलना चाहिए ताकि विकास दर में इजाफा हो और कीमतें स्थिर रहें। मोदी सरकार बढ़ते सब्सिडी बिल को लेकर भी चिंतित है और इसके वाजिब बंटवारे की व्यवस्था करना चाहती है।
'उद्योग समर्थक होने में कोई हर्ज नहीं हैं'
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को भाजपा के एक समारोह में कहा कि उद्योग समर्थक होने में कोई हर्ज नहीं है क्योंकि तेज आर्थिक विकास के लिए देश को निवेश की जरूरत है, जिससे रोजगार पैदा हो और राजस्व में इजाफा हो। सरकार को जब तक राजस्व नहीं मिलेगा तब तक यह इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं कर सकती है और न ही गरीबों के कल्याण के लिए कार्यक्रम चला सकती है। जेटली का कहना था कि यूपीए सरकार की ओर से रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स लागू करने की बात से निवेशकों में नकारात्मक संकेत गया है।
'बचत को बढ़ावा देना है जरूरी'
वित्त मंत्री ने कहा देश में बचत को बढ़ावा देना जरूरी है। पिछली यूपीए सरकार के दौरान बचत दर 33 फीसदी से घट कर 30 फीसदी पहुंच गई। लिहाजा अब देश में बचत को बढ़ावा देने के उपाय करने होंगे। जेटली ने कहा कि देश में ऊंची महंगाई और कम विकास दर की स्थिति बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि अगर महंगाई ज्यादा है तो आप ऐसी जगह से शुरुआत करते हैं, जहां विकास दर नीची हो। इस स्थिति को बदलना होगा। जब तक हम मौजूदा स्थिति की वजहों की पड़ताल नहीं करेंगे तब तक इससे निकलना मुश्किल होगा। दरअसल यूपीए सरकार में नीतिगत फैसलों में ठहराव और लोकलुभावन फैसलों की वजह से अर्थव्यवस्था की यह दुर्गति हुई है।
सरकार को रखना चाहिए ध्यान
जेटली ने कहा कि सरकार बढ़ते सब्सिडी बिल को कम करने की जरूरत समझती है। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनाव से पहले लोकलुभावन फैसलों के तहत पैसे खर्च करने से बचना चाहिए। अगर सरकार कर्ज माफ कर दे तो सरकार का खजाना खाली हो जाएगा और आर्थिक अनुशासन भंग हो जाएगा। जेटली ने स्वीकार किया उन्हें भी सब्सिडी मिलती है लेकिन वह मानते हैं कि उन्हें इसका लाभ नहीं लेना चाहिए।