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नेशनल हेल्थ स्कीम लाए सरकार: हरि नारायण
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Dec 2012 09:34 PM IST
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सरकार को देश में स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए एक नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लांच करनी चाहिए। स्कीम में मौजूदा आरोग्यश्री स्कीम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का विलय कर उसके लाभ को सभी तक पहुंचाया जा सकता है।
उद्योग संगठन फिक्की की ओर से यहां हेल्थ इंश्योरेंस पर आयोजित समारोह में भारतीय बीमा विकास प्राधिकरण (इरडा) के चेयरमैन जे. हरि नारायण ने कहा कि सरकार को पूरे सिस्टम को सुधारने की जगह मौजूदा दो योजनाओं को मिलाकर नई नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लाना चाहिए। जिस तरह गरीबी रेखा से नीचे के तबके को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने का प्रावधान है, उसी तरह गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को भी स्कीम में भागीदारी बनाया जा सकता है। इससे बीमा कंपनियों की लागत में भी कमी आएगी।
इरडा प्रमुख ने हेल्थ केयर सेक्टर में आईसीडी कोड के सरलीकरण, आंकड़ों की साझेदारी आदि की भी बात कही है। जे. हरि नारायण के अनुसार भारत में ज्यादातर हेल्थ कवर गंभीर बीमारियों, मातृत्व आदि के लिए ही कराया जाता है। जबकि, साधारण बीमारियां ज्यादातर इस दायरे से बाहर हैं।
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ऐसे में एक नई बीमा मॉडल की जरूरत है, जो कि दोनों तरह की बीमारियों को शामिल कर सके। जहां तक आईसीडी कोड की बात है वह काफी जटिल है, जिसे छोटे अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के लिए समझना और लागू करना मुश्किल है। ऐसे में इसके सरलीकरण की जरूरत है।
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उद्योग संगठन फिक्की की ओर से यहां हेल्थ इंश्योरेंस पर आयोजित समारोह में भारतीय बीमा विकास प्राधिकरण (इरडा) के चेयरमैन जे. हरि नारायण ने कहा कि सरकार को पूरे सिस्टम को सुधारने की जगह मौजूदा दो योजनाओं को मिलाकर नई नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लाना चाहिए। जिस तरह गरीबी रेखा से नीचे के तबके को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने का प्रावधान है, उसी तरह गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को भी स्कीम में भागीदारी बनाया जा सकता है। इससे बीमा कंपनियों की लागत में भी कमी आएगी।
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इरडा प्रमुख ने हेल्थ केयर सेक्टर में आईसीडी कोड के सरलीकरण, आंकड़ों की साझेदारी आदि की भी बात कही है। जे. हरि नारायण के अनुसार भारत में ज्यादातर हेल्थ कवर गंभीर बीमारियों, मातृत्व आदि के लिए ही कराया जाता है। जबकि, साधारण बीमारियां ज्यादातर इस दायरे से बाहर हैं।
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ऐसे में एक नई बीमा मॉडल की जरूरत है, जो कि दोनों तरह की बीमारियों को शामिल कर सके। जहां तक आईसीडी कोड की बात है वह काफी जटिल है, जिसे छोटे अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के लिए समझना और लागू करना मुश्किल है। ऐसे में इसके सरलीकरण की जरूरत है।