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चीनी मिलों को मिला 7200 करोड़ का तोहफा!
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 07 Dec 2013 03:19 AM IST
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चीनी मिलों को केंद्र सरकार से भी राहत पैकेज मिलने का इंतजाम हो गया है। प्रधानमंत्री की ओर से गठित केंद्रीय मंत्रियों के समूह ने चीनी उद्योग को 7,200 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त के कर्ज समेत कई रियायतों की सिफारिश की है।
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चीनी मिलों की अधिकांश मांगे केंद्र ने मान ली हैं लेकिन गन्ने के भाव का मुद्दा राज्य सरकार के पाले में डाल दिया।
शुक्रवार को गन्ना उत्पादक राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद कृषि मंत्री शरद पवार ने बताया कि चीनी मिलों को तीन साल की एक्साइज ड्यूटी, सेस और सरचार्ज के बराबर बैंकों से कर्ज मिलेगा, जिसका 12 फीसदी ब्याज माफ होगा। लेकिन इस कर्ज का इस्तेमाल गन्ना किसानों के भुगतान के लिए ही करना पड़ेगा।
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कुल 12 फीसदी की ब्याज माफी में से 7 फीसदी शुगर डेवलपमेंट फंड से आएगा जबकि 5 फीसदी ब्याज केंद्र सरकार भरेगी। इस तरह मिलने वाला कुल 7,200 करोड़ रुपये का कर्ज मिलों को 5 साल में चुकाना होगा, जिसमें शुरू के दो साल अदायगी से छूट दी जाएगी। सरकार चीनी मिलों के मौजूदा कर्ज के पुनर्गठन पर भी राजी हो गई है।
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मंत्रियों की समिति ने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की सीमा 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी करने और प्रति वर्ष 40 लाख टन रॉ शुगर के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन देने का फैसला भी किया है। हालांकि, चीनी के आयात पर फिलहाल प्रतिबंध नहीं लगा है।
शरद पवार का कहना है कि गत जुलाई से ओपन जनरल लाइसेंस के तहत चीनी का आयात नहीं हुआ है, लेकिन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ी तो आयात शुल्क बढ़ाया जा सकता है। चीनी के बफर स्टॉक बनाने के मुद्दे पर खाद्य मंत्रालय से विस्तृत प्रस्ताव मांगा गया है।
बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदरंबरम, खाद्य मंत्री केवी थॉमस, नागर विमानन मंत्री अजित सिंह के अलावा पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली भी मौजूद थे। एथनॉल के मुद्दे पर एक अंतर-विभागीय समिति चीनी मिलों और तेल कंपनियों से बातचीत कर अगले सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट देगी।
गौरतलब है कि इससे पहले यूपी सरकार भी चीनी मिलों को एंट्री टैक्स, खरीद शुल्क और गन्ना सोसायटी कमीशन में छूट का तोहफा दे चुकी हैं। इस बैठक में यूपी के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव और महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री पृथ्वीराज चौहान ने भी गन्ना किसानों की नाराजगी से केंद्र को अवगत कराया।
गन्ने का भाव राज्यों के भरोसे
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों की मुराद भले ही पूरी कर दी हो, लेकिन गन्ने के भाव का मुद्दा राज्यों पर डाल दिया है। कृषि मंत्री शरद पवार का कहना है कि गन्ने के भाव का फार्मूला तय करने के लिए राज्यों को एक समिति के गठन का सुझाव दिया गया है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश पहले ही इस तरह की समिति बनाने का ऐलान कर चुके हैं। गन्ना मूल्य के लिए राज्य आमदनी में बंटवारे के विभिन्न तरीकों पर विचार कर सकते हैं।
किसानों का बकाया चुकाने में होगी आसानी: इस्मा
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने केंद्र सरकार के राहत पैकेज का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे चीनी उद्योगों को वित्तीय संकट का मुकाबला करने और किसानों का बकाया भुगतान देने में मदद मिलेगी। लेकिन समस्या के दीर्घकालीन समाधान के लिए गन्ने के लाभ का तर्कसंगत और पारदर्शी फार्मूला लागू करना जरूरी है।