सरकारी बैंकों का होगा निजीकरण, घटेगी हिस्सेदारी!
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सार्वजनिक बैंकों की पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करने की तैयारी में है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि वह किसी भी हालत में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं करेगी।
यानी सरकारी बैंकों के मौजूदा स्वामित्व स्वरूप में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होगा। सरकार की चालू वित्त वर्ष में एसबीआई सहित दूसरे बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को कम करने की योजना है।
शनिवार को केनरा बैंक के कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बैंकों को पूंजी सहायता पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। हमने इसके लिए चार साल का प्रस्ताव तैयार किया है।
बैंक अपनी हिस्सेदारी बेच कर जुटाएंगे पूंजी
सरकारी बैंक अपनी हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाएंगे। लेकिन इसके तहत बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं की जाएगी। हम लोगों को सीधे तौर पर बैंक में हिस्सेदारी करने का मौका देंगे।
बैंक मिली पूंजी से अपनी बैंकिंग सेवाओं का विस्तार कर सकेंगे। खास तौर से उन 42 फीसदी लोगों तक बैंकों की पहुंच बढ़ेगी, जो अभी बैंकिंग सेवाओं से दूर हैं। इस बीच, वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा मामलों के विभाग के सचिव जी.एस.संधू ने कहा है कि सरकारी बैंकों को हिस्सेदारी बेचने का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
इसके तहत भारतीय स्टेट बैंक सहित दूसरे बैंकों की कितनी हिस्सेदारी बेची जाएगी, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इस संबंध में अगले माह डफ्ट कैबिनेट नोट तैयार होने की उम्मीद है।