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सरकार ने कहा हमें भरना है खजाना, बताओ कैसे भरेगा?
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 09 Jan 2014 07:57 PM IST
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चालू वित्त वर्ष में बचे तीन महीने के अंदर सरकार अब सभी तरह के उपाय कर अपने घाटे में कमी करने का जोर लगा रही है। इसके लिए सरकार हर संभव रास्ता तलाश रही है। जिससे ज्यादा से ज्यादा पूंजी जुटाई जा सके।
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इसमें सार्वजनिक उपक्रमों से पूंजी जुटाकर विनिवेश लक्ष्य पूरी करने की कवायद की बात हो, या फिर सरकारी बैंकों से लाभांश लेने की तैयारी, सरकार कोई भी रास्ता छोड़ने के मूड में नही है। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक बैंकों से इस साल लाभांश देने का ब्यौरा मांग है।
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सार्वजनिक बैंकों से लाभांश लेने का यह कवायद तब और आश्चर्य में डालती है, जबकि पिछले कुछ तिमाही से सभी बैंकों के लाभ में कमी आती जा रही है। साथ ही उनके डूबते कर्ज की तादाद भी बढ़ती जा रही है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सभी सार्वजनिक बैंकों से कहा गया है कि वह अपने बोर्ड के जरिए लाभांश की समीक्षा कर वित्त मंत्रालय को जवाब दें।
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इस तरह की मांग की पुष्टि करते हुए एक सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय के तरफ से इस तरह मांग आई है। जहां तक बैंकों के लाभांश देने की बात है, तो बैंक के बोर्ड इस मामले में समीक्षा कर तय करेंगे कि वह कितना लाभांश सरकार को दे सकते हैं। या फिर देने की स्थिति में नहीं हैं।
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के लिए 40 हजार करोड़ रुपये पूंजी जुटाने और राजकोषीय घाटे को जीडीपी के मुकाबले 4.8 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष के लिए नौ महीने बीतने के बाद भी अभी केवल 3000 करोड़ रुपये जुटा पाई है।
सरकार के लिए सभी बड़ी समस्या सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश के लिए कंपनियों को तैयार न कर पाना है। इस कड़ी में बृहस्पतिवार को आईओसी के विनिवेश पर भी सरकार को फैसला नहीं कर पाई है। इसी तरह 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी को लेकर भी टेलीकॉम कंपनियों में ज्यादा उत्साह नहीं है। जिसे देखते हुए सरकार की पूरी उम्मीद सरकारी कंपनियों पर ही टिकी है।