गूगल ने अमेरिका के लिए की खुफियागिरी
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विकीलीक्स ने गूगल पर आरोप लगाया है कि उसने बगैर बताए विकीलीक्स के कुछ कर्मचारियों के ईमेल और डिजिटल डेटा अमेरिकी सरकार को दिए हैं। विकीलीक्स ने गूगल के इस काम को पत्रकारिता और सुरक्षा मुद्दों पर काम करने वाले पत्रकारों पर हमला करार दिया है।
विकीलीक्स के वकीलों की तरफ से गूगल को भेजे गए एक पत्र में पूछा है कि गूगल ने करीब 3 साल पहले उनके अधिकारियों की जानकारी अमेरिकी सरकार को क्यों सौंपी है? साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि मार्च 2012 में सौंपी जानकारी के बारे में 23 दिसंबर 2014 तक भी विकीलीक्स को क्यों नहीं बताया गया।
जेनेवा में हुए एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में विकीलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे की तरफ से जज बाल्ताजार गारजेन ने कहा कि विकीलीक्स के स्टाफ को पिछले साल दिसंबर में गूगल की तरफ से यह जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 2012 में सरकार को सौंपी गई जानकारियों में ईमेल का कंटेट भी था।
तलाशी वारंट के तहत दी थी जानकारी
गूगल के अनुसार उसने 2012 में यह सारी जानकारी अमेरिकी न्यायालय की तरफ से जारी तलाशी वारंट के तहत अमेरिकी सरकार को मुहैया कराई थी। इस वारंट में जासूसी, धोखेबाजी और साजिश की जांच के तहत गूगल से फोन नंबर, आईपी एड्रेस और ईमेल का कंटेट मांगा गया था।
इसमें विकीलीक्स के 3 कर्मचारी सारा हैरिसन, क्रिस्टीन ह्राफंसन और जोसफ फैरेल की तरफ से उपयोग किए जाने वाले सभी आंकड़े भी सौंपने थे। इनमें 22 मार्च 2012 के बाद के आंकड़े शामिल थे। जज गारजेन ने इसे गैरकानूनी बताते हुए कहा है कि बिना बताए किसी की जानकारी अमेरिकी सरकार को सौंपना कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।