फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   gom will look at prices of medicines

दवाओं की कीमतों पर जीओएम फिर करेगी विचार

Wed, 14 Nov 2012 10:20 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 14 Nov 2012 10:20 PM IST
विज्ञापन
gom will look at prices of medicines

नई दवा नीति के तहत आवश्यक दवाओं की कीमतें बाजार आधारित तय करने के मंत्रियों के समूह के फैसले पर वित्त मंत्रालय ने ऐतराज जताया है। इसकी वजह से नई दवा नीति को आठ नवंबर को हुई कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। ऐसे में अब एक बार फिर शरद पवार की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह की बैठक शुक्रवार को होगी।

विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने दवाओं की कीमतें लागत के आधार पर तय करने की वकालत की है। साथ ही यह भी कहा है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है ऐसे में इस पर राज्य सरकारों की भी राय लेना जरूरी है। इसके पहले आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में गठित किए गए मंत्रियों के समूह (जीओएम) बाजार आधारित फार्मूले की सिफारिश की थी। इसके तहत आवश्यक दवाओं की कीमतें बाजार में एक फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली सभी दवाओं की औसत कीमत के आधार पर तय की जानी थी।
विज्ञापन


हालांकि इस फार्मूले पर गैर सरकारी संगठनों का पहले से ही मानना था कि प्रस्तावित फार्मूले से दवाओं की कीमतें कम होने के बजाए बढ़ेंगी। ऐसे में लागत आधारित फार्मूला जारी रखना चाहिए। नई दवा नीति के तहत सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा दवाओं की कीमत नियंत्रण के दायरे में आ जाएं। नई नीति के जरिए कंपनियों की इन दवाओं पर कीमतें तय करने की मनमानी कम हो सकेगी। इंडस्ट्री के अनुसार बाजार आधारित फार्मूले से 30 फीसदी दवाएं इसके तहत आ सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed