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सोने पर मिल सकेगा अधिक लोन
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jan 2013 12:47 AM IST
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सोने के बदले गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से कर्ज लेना अब ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी होगा। भारतीय रिजर्व बैंक के सलाहकार यूबी राव की अध्यक्षता में गठित वर्किंग समूह की सिफारिश के अनुसार एनबीएफसी के लिए एक बेंचमार्क रेट बनाया जाना चाहिए। साथ ही ग्राहकों की शिकायत के लिए लोकपाल जैसी प्रणाली बनानी चाहिए।
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इसके अलावा, वर्किंग समूह ने कंपनियों के लिए सोने के बदले कर्ज देने (एलटीवी) की सीमा को 60 फीसदी को बढ़ाकर 75 फीसदी करने की बात कही है। इस कदम से भी ग्राहकों को सोने की कीमत के बदले ज्यादा कर्ज मिल सकेगा। वर्किंग समूह की रिपोर्ट के अनुसार गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के ग्राहकों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। साथ ही इस तरह की शिकायतें भी आ रही हैं कि कंपनियां ब्याज दरों के मामले में मनमानी कर रही हैं।
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ऐसे में यह जरूरी है कि कंपनियों के लिए बेंचमार्क रेट बनाया जाए या फिर भारतीय स्टेट बैंक के अधिकतम ब्याज दर के अनुसार इसका निर्धारण किया जाए। साथ ही कर्ज के भुगतान में देरी पर पेनॉल्टी आदि का प्रावधान किया जाए, जिससे कंपनियां पारदर्शी ब्याज दर प्रणाली अपना सके। समूह ने ग्राहकों की शिकायतों के लिए लोकपाल जैसी प्रणाली बनाने की बात कही है।
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कंपनियों के लिए बड़ी राहत की सिफारिश करते हुए वर्किंग समूह ने कहा कि उन्हें 75 फीसदी तक एलटीवी की छूट देनी चाहिए। आरबीआई ने एक साल पहले गोल्ड लोन कारोबार में जोखिम को देखते हुए एलटीवी को 60 फीसदी कर दिया था। साथ ही कंपनियों के लिए शाखाओं के विस्तार पर भी लगाम लगाने की प्रमुख सिफारिश की है। इसमें आरबीआई ने कहा है कि कई कंपनियां प्रति वर्ष 1,000 या उससे ज्यादा शाखाएं खोल रही हैं। जिसे देखते हुए यह जरूरी है कि इस पर लगाम लगाई जाए। ऐसे में एक सीमा के बाद शाखा खोलने के अनुमति का प्रावधान होना चाहिए।
आरबीआई की सिफारिशों पर मुत्थूट फिनकार्प के वाइस प्रेसिडेंट सद्दाफ सैयद ने अमर उजाला को बताया कि आरबीआई की रिपोर्ट से गोल्ड लोन कंपनियों का कारोबार में तेजी आएगी। खासतौर से लोन टू वैल्यू के प्रावधान में 75 फीसदी की सिफारिश से निश्चित तौर पर कारोबार में फायदा मिलेगा। इसके अलावा आरबीआई ने इंडस्ट्री के लिए कई कदमों की बात की है जिससे निश्चित तौर पर इंडस्ट्री को फायदा होगा।