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सोने की रिसाइकलिंग से घट सकेगा सोने का आयात
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2015 09:15 AM IST
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मुथूट पपचन समूह ने हाल ही में रिसाइकिल गोल्ड के कारोबार में कदम रखा है। क्या होता है इसमें?
इस बात को सभी जानते हैं कि भारत में सोने की भारी खपत है और इसके लिए हर साल भारी मात्रा में सोने का आयात होता है। इससे भुगतान संतुलन तो गड़बड़ाता ही है, राजकोषीय घाटा भी बढ़ रहा है। इस स्थिति में परिवर्तन हो सकता है बशर्ते घरों या मंदिरों में रखा सोना निकाल कर उसे रिसाइकिल किया जाए। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि भारत में विभिन्न मंदिरों और घरों में करीब 25,000 टन सोना है।
रिसाइकिल की जरूरत क्यों है, पुराने आभूषणों को गला कर सीधे नया आभूषण नहीं बनाया जा सकता है?
ऐसा नहीं हो सकता है क्योंकि पुराने सोने में अशुद्धता की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। अभी तो हॉलमार्किंग का दौर शुरू हो गया और लोगों में जागरूकता भी ज्यादा आ गई। पहले के आभूषणों में अशुद्धता ज्यादा थी इसलिए उसकी रिसाइकिलिंग जरूरी है।
आप इस दिशा में क्या करते हैं?
हमने मुथूट गोल्ड प्वाइंट नाम सेे आउटलेट खोला है, जहां ग्राहक के सामने हाई एंड एक्सरे मशीन से सोने की जांच करते हैं। उसमें तुरंत पता चल जाता है कि कितनी अशुद्धता है। फिर बता दिया जाता है उसके सोने का क्या मूल्य मिलेगा। आमतौर पर सुनार पूरे दिन एक रेट चलाते हैं लेकिन हमारे यहां एमसीएक्स या एनसीडीएक्स का लाइव रेट दिखता है। जिस समय सोना रिसाइकिल हुआ, उस समय का रेट ग्राहकों को मिलता है। हमारे यहां जांच कराने का मतलब यह नहीं है कि जांच करवा ली, तो सोना बेचना ही होगा। आपकी मर्जी है, इसे बेचे या न बेेचें।
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सोना खरीद कर क्या करते हैं?
हमारे सभी गोल्ड प्वाइंट में इंडक्शन मेल्टर लगा है जिसमें ग्राहक चाहे तो सोना सामने गलवा कर देख लें। फिर उस सोने का बार बनाया जाता है। आमतौर पर देखें, तो अभी तक बैंक ही इस तरह की रिसाइकिलिंग कारोबार को चलाते थे। एनबीएफसी में हम पहले हैं, जिसने इस तरह का काम शुरू किया है।
अभी कितने सेंटर चल रहे हैं?
अभी तो हमारा कुछ ही केंद्र केरल में चल रहे हैं। हमने तीन साल के अंदर 20 केंद्र खोलने की योजना बनाई है। हमारी कोशिश है कि सभी मेट्रो शहरों और टियर वन शहर में यह केंद्र खोले जाएं।
आपने सोने के गहनों की बिक्री भी शुरू की थी, क्या स्थिति है इसकी?
जी, हमने दो साल पहले स्वर्ण वर्षा के नाम से सोने के हल्के आभूषणों की बिक्री के लिए यह आउटलेट शुरू किया था। इसके तहत हम डेढ़ ग्राम से 10 ग्राम तक के सोने के आभूषण बेचते हैं। इसके तहत बिकने वाले सभी आभूषण हॉलमार्क्ड होते हैं। हम इन आभूषणों को खुद अपने पर्यवेक्षण में बनवाते हैं, ताकि ग्राहकों को पूरी संतुष्टि मिल सके। अभी तक माना जाता था कि सिर्फ बड़े खरीदार ही हॉलमार्क वाले गहने खरीदते थे, लेकिन हमने इस मिथक को तोड़ा। हमने डेढ़ दो ग्राम सोने के आभूषण खरीदने वालों को भी हॉलमार्क वाले गहने खरीदने का विकल्प दिया, क्योंकि हमारे सभी आभूषण हॉलमार्क वाले हैं।
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इस बात को सभी जानते हैं कि भारत में सोने की भारी खपत है और इसके लिए हर साल भारी मात्रा में सोने का आयात होता है। इससे भुगतान संतुलन तो गड़बड़ाता ही है, राजकोषीय घाटा भी बढ़ रहा है। इस स्थिति में परिवर्तन हो सकता है बशर्ते घरों या मंदिरों में रखा सोना निकाल कर उसे रिसाइकिल किया जाए। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि भारत में विभिन्न मंदिरों और घरों में करीब 25,000 टन सोना है।
रिसाइकिल की जरूरत क्यों है, पुराने आभूषणों को गला कर सीधे नया आभूषण नहीं बनाया जा सकता है?
ऐसा नहीं हो सकता है क्योंकि पुराने सोने में अशुद्धता की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। अभी तो हॉलमार्किंग का दौर शुरू हो गया और लोगों में जागरूकता भी ज्यादा आ गई। पहले के आभूषणों में अशुद्धता ज्यादा थी इसलिए उसकी रिसाइकिलिंग जरूरी है।
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आप इस दिशा में क्या करते हैं?
हमने मुथूट गोल्ड प्वाइंट नाम सेे आउटलेट खोला है, जहां ग्राहक के सामने हाई एंड एक्सरे मशीन से सोने की जांच करते हैं। उसमें तुरंत पता चल जाता है कि कितनी अशुद्धता है। फिर बता दिया जाता है उसके सोने का क्या मूल्य मिलेगा। आमतौर पर सुनार पूरे दिन एक रेट चलाते हैं लेकिन हमारे यहां एमसीएक्स या एनसीडीएक्स का लाइव रेट दिखता है। जिस समय सोना रिसाइकिल हुआ, उस समय का रेट ग्राहकों को मिलता है। हमारे यहां जांच कराने का मतलब यह नहीं है कि जांच करवा ली, तो सोना बेचना ही होगा। आपकी मर्जी है, इसे बेचे या न बेेचें।
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सोना खरीद कर क्या करते हैं?
हमारे सभी गोल्ड प्वाइंट में इंडक्शन मेल्टर लगा है जिसमें ग्राहक चाहे तो सोना सामने गलवा कर देख लें। फिर उस सोने का बार बनाया जाता है। आमतौर पर देखें, तो अभी तक बैंक ही इस तरह की रिसाइकिलिंग कारोबार को चलाते थे। एनबीएफसी में हम पहले हैं, जिसने इस तरह का काम शुरू किया है।
अभी कितने सेंटर चल रहे हैं?
अभी तो हमारा कुछ ही केंद्र केरल में चल रहे हैं। हमने तीन साल के अंदर 20 केंद्र खोलने की योजना बनाई है। हमारी कोशिश है कि सभी मेट्रो शहरों और टियर वन शहर में यह केंद्र खोले जाएं।
आपने सोने के गहनों की बिक्री भी शुरू की थी, क्या स्थिति है इसकी?
जी, हमने दो साल पहले स्वर्ण वर्षा के नाम से सोने के हल्के आभूषणों की बिक्री के लिए यह आउटलेट शुरू किया था। इसके तहत हम डेढ़ ग्राम से 10 ग्राम तक के सोने के आभूषण बेचते हैं। इसके तहत बिकने वाले सभी आभूषण हॉलमार्क्ड होते हैं। हम इन आभूषणों को खुद अपने पर्यवेक्षण में बनवाते हैं, ताकि ग्राहकों को पूरी संतुष्टि मिल सके। अभी तक माना जाता था कि सिर्फ बड़े खरीदार ही हॉलमार्क वाले गहने खरीदते थे, लेकिन हमने इस मिथक को तोड़ा। हमने डेढ़ दो ग्राम सोने के आभूषण खरीदने वालों को भी हॉलमार्क वाले गहने खरीदने का विकल्प दिया, क्योंकि हमारे सभी आभूषण हॉलमार्क वाले हैं।