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निवेश के लिए मध्यमवर्गीय परिवारों की पसंद सोना: ऐसोचैम

Wed, 22 Oct 2014 09:14 AM IST
नई दिल्ली /ब्यूरो
नई दिल्ली /ब्यूरो Updated Wed, 22 Oct 2014 09:14 AM IST
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 Gold clear winner among investors in middle class, salary earners
मध्यमवर्गीय परिवार निवेश के लिए भरोसेमंद और स्थिर विकल्प के रूप में सोने में निवेश कर रहें हैं वहीं कुछ परिवार स्टॉक मार्केट के जोखिम भरे विकल्प की ओर लौट रहे हैं।
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केंद्र में नई सरकार बनने के बाद शेयर बाजार में आई तेजी की वजह से खास तौर पर ऐसा हो रहा है। एसोचैम के एक ताजा सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है।

सर्वे में इस बात खात का खास तौर पर उल्लेख किया गया है कि मध्यमवर्गीय परिवारों और वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सोना निवेश का सबसे पसंदीदा विकल्प बन कर उभरा है।
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दिलचस्पत बात यह है कि महिलाओं में ज्वेलरी सबसे पसंदीदा रहा है, वहीं सर्वे में शामिल की गई कामकाजी महिलाओं की बड़ी संख्या निवेश के लिए तेजी से स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड स्कीमों जैसे सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) आदि की ओर लौट रही हैं।
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एसोचैम के ताजा सर्वे के मुताबिक, सर्वे के दौरान उत्तर देने वाले वाले 1200 लोगों में से 72 फीसदी ने कहा कि उन्होंने निवेश के लिए सोने के विकल्प को वरीयता दी। इसके बाद शेयर और म्यूचुअल फंडों के विकल्प निवेश के पसंदीदा विकल्प रहे।

सर्वे में अहमदाबाद, बंगलूरू, चेन्नईए दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे में स्थित कॉरपोरेट और सरकारी कर्मचारियों के जवाब को शामिल किया गया।

सर्वे में शामिल 62 फीसदी से अधिक कॉरपोरेट कर्मचारियों ने निवेश के लिए सोने को वरीयता दी और इसके बाद शेयर और म्यूचुअल फंडों में निवेश किया गया। जवाब देने वालों ने खुलासा किया कि सरकारी और कॉरपोरेट कर्मचारियों के लिए शेयर बाजार में निवेश करने का प्रमुख कारण विशेषज्ञों द्वारा सलाह आसानी से उपलब्ध होना है।

एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डीएस रावत ने पेपर जारी करते हुए कहा कि कॉरपोरेट और सरकारी कर्मचारी अब निवेश के पारंपरिक माध्यमों जैसे पोस्ट आफिसों, फिक्सड डिपॉजिट और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड के बजाए सोने और स्टॉक मार्केट में निवेश पर फोकस कर रहे हैं।


हालांकि करीब 21 फीसदी कर्मचारियों ने कहा कि सुरक्षित रिटर्न की वजह से वे अब भी निवेश के लिए पारंपरिक विकल्पों को वरीयता देते हैं।

त्योहारी सीजन और शादियों का सीजन शुरू होने से पहले सोने की मांग बढ़ रही है। रावत का कहना है कि सितंबर में सोने के आयात में 450 फीसदी इजाफा होने से यह बात स्पष्ट होती है। इसकी वजह से नीति निर्माताओं में चिंता है और सरकार सोने के आयात पर अंकुश लगाने पर विचार कर रही है।
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