{"_id":"103e0afa-5118-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"global-slowdown-may-dampen-export-growth-prospects-in-2013","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंदी से 2013 में भी सुस्त रहेगा निर्यात ","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
मंदी से 2013 में भी सुस्त रहेगा निर्यात
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 28 Dec 2012 11:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पश्चिमी देशों में चुनौतीपूर्ण आर्थिक हालातों के चलते देश का निर्यात 2013 में भी सुस्त बना रह सकता है। पिछले एक साल से ग्लोबल मंदी के चलते देश का निर्यात कमजोर पड़ा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है।
विज्ञापन
इस साल की शुरुआत निर्यात में दोहरे अंक की वृद्धि दर के साथ हुई थी लेकिन इसके बाद इसमें सतत गिरावट रही। मई में निर्यात की वृद्धि दर गिरकर नकारात्मक हो गई थी। सरकार की कोशिश अमेरिका और यूरोप के पारंपरिक बाजारों से विविधता लाने की रही। इसका नतीजा सकारात्मक रहा लेकिन पश्चिमी देशों पर निर्भरता से देश के निर्यात में गिरावट देखने को मिली। पश्चिमी देशों की आर्थिक चुनौतियों के चलते मांग में आई कमी का सीधा असर भारतीय निर्यात पर देखा गया। भारत के निर्यात का एक तिहाई हिस्सा अमेरिका और यूरोपीय बाजारों को किया जाता है।
विज्ञापन
सुस्ती के बावजूद 2011-12 के दौरान देश का निर्यात 300 डॉलर के आंकड़े को पार कर 307 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसके साथ ही इस अवधि में देश का व्यापार घाटा भी बढ़कर 185 अरब डॉलर हो गया। सरकार के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि व्यापार घाटा चालू खाता घाटा और घरेलू मुद्रा को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। अप्रैल-जून तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 3.9 फीसदी पर दर्ज किया गया।
विज्ञापन
वैश्विक मंदी के कारण देश का निर्यात चालू वित्तवर्ष में बहुत मुश्किल से 300 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है, जबकि इसका लक्ष्य 360 अरब डॉलर निर्धारित किया गया था। वाणिज्य सचिव एसआर राव के अनुसार वैश्विक स्तर पर किसी भी घटनाक्रम का देश के व्यापार पर सीधा असर होगा। वैश्विक स्तर पर विकास दर में नरमी आई है। विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) ने 2012 के लिए दुनिया के व्यापार विस्तार के अनुमान को 3.7 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया है। जबकि 2013 के लिए यह अनुमान 5.6 फीसदी से घटाकर 4.5 फीसदी कर दिया गया है।
डब्लूटीओ के महानिदेशक पास्कल लेमी का कहना है कि एक-दूसरे पर तेजी से निर्भर हो रही दुनिया में किसी भी एक जगह के आर्थिक झटकों का असर हर जगह तेजी से फैल जा रहा है। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा का कहना है कि निर्यात में सुस्ती हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह सीधे तौर पर रोजगार के अवसर और जीविका से जुड़ा हुआ है। हालांकि सरकार निर्यातकों को प्रोत्साहित करने करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। हाल ही में वाणिज्य मंत्री ने मार्च 2014 तक निर्यातकों के लिए सस्ते लोन की सुविधा उपलब्ध कराने जैसे कई उपायों की घोषणा की है।