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गार का ‘भूत’ दफन: चिदंबरम

Tue, 22 Jan 2013 10:35 PM IST
हांगकांग/एजेंसी
हांगकांग/एजेंसी Updated Tue, 22 Jan 2013 10:35 PM IST
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ghost of gaar buried says p chidambaram

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि भारत ने गार का भूत ‘दफन’ कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई और पेट्रोलियम कीमतों में बढ़ोतरी जैसे आर्थिक सुधार के महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनसे अब रेटिंग गिरने का खतरा नहीं रह गया है।

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उन्होंने कहा कि गत सितंबर से सरकार की ओर से उठाए जा रहे सुधार के कदमों ने भारत में निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल किया है। चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि वित्तीय घाटे को 5.3 फीसदी के अनुमानित दायरे में नियंत्रित कर लिया जाएगा और अगले साल इसे घटाकर जीडीपी के 4.5 फीसदी पर ला दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि चालू वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 5.7 फीसदी के अनुमान से अधिक 6-7 फीसदी के बीच रह सकती है। वित्त मंत्री ने यहां एक साक्षात्कार में कहा कि यह सार्वभौमिक है कि हमने जनरल एंटी अवायडेंस रूल्स (गार) की स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला और इस ‘भूत’ को दफन कर दिया। निवेशकों के सम्मेलन के लिए यहां एक दिवसीय यात्रा पर आए वित्त मंत्री ने कहा कि जैसा कि पहले से अनुमान था, निवेशकों ने विवादास्पद प्रावधान गार से जुड़े मामले उठाए।
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गार को 2012-13 के बजट में पेश किया गया था। पिछले सप्ताह चिदंबरम में गार को लागू करने की तिथि 2016 तक के लिए टाल देने की घोषणा की। सिटी बैंक और बीएनपी पारिबास की ओर से आयोजित ‘इंडिया फॉर इनवेस्टमेंट कांफ्रेंस’ में चिदंबरम ने 200 से अधिक शीर्ष निवेशकों से मुलाकात की। उन्होंने निवेशकों की सभी चिंताओं को दूर करते हुए भारत में उनके निवेश के प्रति बेहतर माहौल का पक्ष मजबूती से रखा। इसके इस अभियान के तहत बुधवार को वित्त मंत्री चिदंबरम सिंगापुर में निवेशकों से मुलाकात करेंगे।


भारत-चीन की तुलना अप्रासंगिक

भारत-चीन के अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर तुलना अप्रासंगिक है। दोनों देश अलग-अलग तरह की आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। चीन रेवेन्यू सरप्लस देश है। वहां विदेशी मुद्रा भंडार करीब 33.1 खरब डॉलर है। जबकि भारत बढ़ते चालू खाता घाटे की समस्या से जूझ रहा है। हमें विदेशी मुद्रा में चालू घाटे की भरपाई करनी होती है। इसलिए हम विदेशी मुद्रा के इनफ्लो पर अधिक निर्भर हैं। इसमें एफडीआई, एफआईआई और ईसीबी शामिल है। इसलिए हमें लगता है कि दोनों देशों के अर्थव्यवस्थाओं की तुलना नहीं की जानी चाहिए। यह अप्रासंगिक है। 

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