फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   Getting back to mind the joy of old notes

पुराने नोटों की वापसी पर भी खुशी?

Fri, 24 Jan 2014 03:07 PM IST
Updated Fri, 24 Jan 2014 03:07 PM IST
विज्ञापन
Getting back to mind the joy of old notes
आरबीआई द्वारा पुराने नोट वापस लेने का फैसला भले ही कालेधन पर लगाम कसने के लिए है, पर यह पैसा रीयल एस्टेट में छाई सुस्ती के लिए वरदान भी साबित हो सकता है।
विज्ञापन


बैंकर और बाजार के जानकारों के मुताबिक साल 2005 से पहले के नोट 31 मार्च तक इस्तेमाल हो सकेंगे।

ऐसे में कालेधन में रखी पूंजी अगले दो से ढाई महीने में रीयल एस्टेट सेक्टर में तेजी से लगने की संभावना है। इसका असर कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में भी दिख सकता है।
विज्ञापन

1 जुलाई के बाद देना होगा पहचान प्रमाण पत्र

Getting back to mind the joy of old notes

बैंकर्स के अनुसार रिजर्व बैंक ने एक जुलाई के बाद 10 से ज्यादा 500 और 1000 रुपये के नोट बदलने पर पहचान पत्र और निवास स्थान प्रमाण पत्र देने की शर्त लगाई है। यह उन ग्राहकों पर लागू होगी जिनका एक्सचेंज करने वाले बैंक में खाता नहीं है।

इसका सीधा मतलब है कि रिजर्व बैंक को अंदेशा है,कि जो कालाधन अभी तक लोगों के लॉकर, घरों आदि में पड़ा है, वह बाहर आएगा।

इंडियन बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि कालेधन के रूप में रखी पूंजी रीयल एस्टेट सेक्टर में 31 मार्च 2014 तक तेजी से निवेश होने की संभावना है।

अधिकारी के अनुसार कालाधन रखने वाले लोग अगर बैंक जाएंगे, तो उन्हें एक जुलाई से पैनकार्ड आदि विवरण देना जरूरी होगा। यदि वह ऐसा करते हैं, तो वह सीधे तौर पर आयकर विभाग के दायरे में आएंगे। इससे बचने के लिए रीयल एस्टेट एक सुरक्षित तरीका हो सकता है।

नोट छांटने और पहुंचाने की आ सकती है समस्या

Getting back to mind the joy of old notes

बैंकर एसपी सिंह के अनुसार छोटे नोट के साथ-साथ 500 और 1000 रुपये के नोट वापस लेने का कदम निश्चित तौर पर कालेधन को सामने लाने के लिए किया गया है। इसके अलावा पाकिस्तान के तरफ से खास तौर पर जाली नोट के खतरे को देखते हुए भी नोट वापस लेने का कदम रिजर्व बैंक ने उठाया है।

बैंकर्स के अनुसार अप्रैल से नोट बदलने की कवायद शुरू होने के समय, नोट छांटने और उन्हें थोक की मात्रा में पहुंचाने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

इसके तहत भारी मात्रा में नोट को छांटने के लिए प्रणाली विकसित करने जैसी चीजें अगले दो-ढाई महीने में अमल में लाने की तैयारी करनी होगी।

विज्ञापन

ट्रस्ट में भी बढ़ सकता है निवेश

Getting back to mind the joy of old notes
एसबीआई के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार कालेधन को सफेद बनाने के लिए लोग ट्रस्ट के जरिए भी निवेश करेंगे। इसके तहत अचानक कई ट्रस्टों में गुप्त दान की संख्या में इजाफा हो सकता है।

ऐसे ट्रस्टों पर आयकर विभाग की नजर रहेगी। अधिकारी के अनुसार 1977-78 में भी हजार के नोट बाजार से हटाए गए थे।

उस समय लोगों ने नेपाल के जरिए कालेधन को भेजकर पूंजी वापस नेपाल से भारतीय बैंकों में मंगा ली थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed