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कृषि के सहारे 4.8 फीसदी पर आई विकास दर

Sat, 30 Nov 2013 11:29 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 30 Nov 2013 11:29 AM IST
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GDP: agricultural growth at 4.8 per cent

कृषि ने देश की अर्थव्यवस्था को सुस्ती के भंवर में फंसने से बचा लिया है। वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 4.8 फीसदी रही, जो पहली तिमाही में सिर्फ 4.4 फीसदी थी।

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सरकार विकास दर 5 फीसदी से ऊपर रहने के दावे करती रही, लेकिन शुरुआती 6 महीनों में ग्रोथ 4.6 फीसदी तक ही पहुंच पाई है। जबकि पिछले साल की पहली छमाही में विकास दर 5.3 फीसदी थी। कृषि के अलावा बिजली उत्पादन और कंस्ट्रक्शन और वित्तीय सेवाओं की स्थिति सुधरी है।
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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में जबरदस्त सुधार आया है। दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र की विकास दर पहली तिमाही में 2.7 फीसदी से बढ़कर 4.6 फीसदी तक पहुंच गई है।
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यह इसलिए अहम है क्योंकि पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर सिर्फ 1.7 फीसदी थी। कृषि के अलावा बिजली, गैस और जल आपूर्ति की ग्रोथ भी 3.7 फीसदी से बढ़कर 7.7 फीसदी तक पहुंच गई है।

कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ भी तिमाही दर तिमाही आधार पर 2.8 फीसदी से बढ़कर 4.3 फीसदी रही है। मंदी की मार झेल रहे मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी मामूली सुधार आया है।

दूसरी तिमाही के दौरान विकास दर बढ़ने से अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखने के सरकारी दावों को बल मिला है। लेकिन आर्थिक मोर्चे पर सरकार की चुनौतियां पिछले साल से ज्यादा गंभीर हैं।

गत वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में विकास दर क्रमश: 5.4 और 5.2 फीसदी थी, जो इस साल सिर्फ 4.4 और 4.6 फीसदी है। इससे साफ है कि इस साल पांच विकास विकास दर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाकी बचे महीनों में 5.4 फीसदी से ऊपर की विकास दर की दरकार है।

उद्योग जगत ने की सस्ते कर्ज की मांग
उद्योग जगत ने विकास दर के आंकड़ों पर संतोष जाहिर करते हुए सस्ते कर्ज की मांग तेज कर दी है। फिक्की की अध्यक्ष नैनालाल किदवई ने जीडीपी के आंकड़ों को अच्छा संकेत बताया है।


किदवई के अनुसार अब सरकार को महंगाई में कमी लाने और ब्याज दरों को सस्ता करने के कदम उठाने चाहिए। सीआईआई के अध्यक्ष चंद्रजीत बनर्जी ने विकास दर पांच फीसदी से कम रहने पर निराशा जताई है।

उन्होंने कहा है कि लगातार चौथी बार विकास दर 5 फीसदी से कम है। यह स्थिति तब है जबकि मानसून न केवल अच्छा रहा है बल्कि निर्यात में भी तेजी आई है।

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