गैस होगी कितनी महंगी, पता चलेगा आज
गैस कीमतों पर रंगराजन फार्मूले की समीक्षा करने के लिए गठित की गई सचिवों की समिति (सीओएस) अपनी रिपोर्ट बुधवार को तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सौंप सकती है।
सीओएस अपनी रिपोर्ट में गैस की नई कीमतों को अंतिम रूप देने पर सुझाव देगी। ऐसे में माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने वादे के अनुसार 30 सितंबर तक गैस की नई कीमतों पर अधिसूचना जारी कर सकती है।
एक समारोह के बाहर बातचीत में पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्रा ने कहा कि चार सदस्यीय सीओएस बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। सचिवों की समिति ने इस मुद्दे पर गैस उत्पादकों और उपभोक्ताओं से विचार विमर्श किया है।
सचिवों की समिति को रंगराजन समिति फार्मूले सहित गैस कीमतों से जुड़े हर पहलू का परीक्षण करने को कहा गया था। वहीं आरआईएल और उसकी पार्टनर कंपनियों बीपी और निको रिसोर्सेज ने गैस कीमतों की समीक्षा के मुद्दे पर सरकार को आर्बिट्रेशन नोटिस भेजा है।
गैस की कीमतों में होगी बढ़ोतरी
गैस की कीमतें बढ़ने से बिजली की दरों, यूरिया की लागत, सीएनजी की दरों और कुकिंग गैस की कीमतों में इजाफा होगा। इससे महंगाई और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।
इससे लंबी अवधि में ब्याज दरों को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास भी पटरी से उतर सकते हैं। आकलन के मुताबिक गैस की कीमत एक डॉलर बढ़ने पर यूरिया उत्पादन की लागत प्रति टन 1,370 रुपये बढ़ जाएगी और बिजली की दरों में प्रति यूनिट 45 पैसे का इजाफा होगा।
इससे सीएनजी की कीमतों में 2.81 रुपये प्रति किलोग्राम और कुकिंग गैस की लागत में 1.89 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर इजाफा होगा।
क्या है मोदी सरकार का मानना?
मौजूदा समय में निजी और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा गैस की बिक्री मंत्रालय द्वारा अधिसूचित कीमत 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू पर की जाती है।
यूपीए-2 सरकार ने अपने कार्यकाल में 1 अप्रैल, 2014 से गैस की नई कीमत 8 डॉलर से 8.4 डॉलर प्रति एमबीटीयू की रेंज में करने को मंजूरी दे दी थी।
हालांकि चुनाव आयोग द्वारा नई कीमतों को स्थगित किए जाने की वजह से कीमतों को अधिसूचित नहीं किया जा सका। हालांकि नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद रंगराजन फार्मूल के आधार पर नई गैस कीमतों को अधिसूचित नहीं किया।
मोदी सरकार का मानना है कि रंगराजन फार्मूला खामियों से भरा है और इस पर नए सिरे से विचार किए जाने की जरूरत है। सरकार ने गैस कीमतों पर रंगराजन फार्मूले की समीक्षा करने और 30 सितंबर तक नई कीमतें लागू करने के लिए नए तंत्र पर सुझाव देने के लिए चार सदस्यीय सीओएस का गठन किया था।
रिलायंस ने की थी गैस बढ़ोतरी की मांग
ऊर्जा और उर्वरक मंत्रालयों के साथ-साथ एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यसर्स (एपीपी) ने केंद्र सरकार को बताया था कि पावर सेक्टर उत्पादन के मोर्चे पर संकट का सामना कर रहा है और गैस कीमतें 5 डॉलर प्रति एमबीटीयू से अधिक होने पर चीजें आर्थिक रूप से वहनीय नहीं रह जाएंगी।
ऊर्जा और उर्वरक मंत्रालयों का कहना था कि गैस कीमत 5 डॉलर से प्रति एमबीटीयू से ज्यादा होने पर बिजली के उपभोक्ताओं और उर्वरक के लिए किसानों को काफी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
वहीं दूसरी तरफ निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), बीपी, एस्सार, केयर्न एनर्जी और अन्य ने गैस की कीमतें दोगुनी किए जाने की जोरदार वकालत की है। इन कंपनियों का कहना है कि मौजूदा दरों पर गैस फील्ड से उत्पादन और उत्खनन की गतिविधियां आर्थिक रूप से वहनीय नहीं हैं।