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मोदी के मंत्री पर उठे सवाल, जवाब देगा कौन?

Fri, 06 Jun 2014 10:27 PM IST
Updated Fri, 06 Jun 2014 10:27 PM IST
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gas pricing issue up roar who will be give answer?

पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय की ओर से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को एक जुलाई से गैस के दाम बढ़ाने के दिए गए कथित आश्वासन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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इससे न सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान की अगुवाई में पेट्रोलियम मंत्रालय में फैसले लेने की प्रक्रिया में खामियों का खुलासा हुआ है बल्कि भाजपा और इसके वरिष्ठ नेताओं की ओर से लगातार दिए गए उस आश्वासन पर भी सवाल उठने लगे हैं जिसमें उन्होंने सत्ता में आने के बाद गैस कीमतों की समीक्षा करने की बात कही थी।
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सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला तो यह है कि प्रधानमंत्री को इस मामले में ब्रीफ किए जाने से पहले ही रिलायंस इंडस्ट्रीज को यह बता दिया गया कि गैस के दाम एक जुलाई से बढ़ जाएंगे।
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अभी मोदी के सामने आना है पूरा मामला

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पेट्रोलियम मंत्रालय का कामकाज करने का तौर-तरीका कोई छिपी बात नहीं है। मंत्रालय का कामकाज करने का तरीका बेहद रहस्यमयी है और इसमें कहीं भी पारदर्शिता नहीं झलकती।

लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से गैस कीमतों में बढ़ोतरी को हरी झंडी देने से पहले ही मंत्रालय ने रिलायंस को जिस तरह से इसकी जानकारी दी वह बेहद चौंकाने वाला है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,‘प्रधानमंत्री के सामने गैस कीमतों में बढ़ोतरी का मामला अगले सप्ताह किसी समय पेश किया जाना है। इसमें पेट्रोलियम सब्सिडी और तेल-गैस सेक्टर में किए जाने वाले सुधारों पर भी चर्चा होगी।

यह तय था कि प्रधानमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद ही गैस की नई कीमतें अधिसूचित की जाएंगी। लेकिन पेट्रोलियम मंत्री ने इस मामले में अपनी ओर से कदम उठा कर कारपोरेट घरानों के हाथों में खेलना शुरू कर दिया है।’

यशवंत सिन्हा की अगुवाई वाली सरकार करेगी फैसला

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यह तो और भी चौंकाने वाला है कि पार्टी के प्रवक्ता और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद लगातार यह कहते रहे हैं कि भाजपा यशवंत सिन्हा की अगुवाई वाली संसद की स्थायी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर गैस कीमतों की समीक्षा करेगी, लेकिन मोदी सरकार ने इस पर यू टर्न ले लिया।

वह अपना यह वादा पूरी तरह भूल गई है और अब कारपोरेट कंपनियों के दबाव में नई गैस कीमतें अधिसूचित करने की ओर बढ़ रही हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि नई गैस कीमतें सार्वजनिक तेल कंपनियों पर भी लागू होंगी लेकिन जिस तरह बगैर किसी पारदर्शिता के तहत यह कवायद हुई उसने सबको चौंका दिया है।

गैस के महंगा होने से पड़ेगा असर

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मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘गैस कीमतों के बढ़ने के बाद इससे जुड़ी सभी चीजों के दाम बढ़ेंगे। सीएनजी की कीमतों में प्रति किलो नौ रुपए की बढ़ोतरी हो जाएगी।

उत्पादन लागत बढ़ने से गैस से पैदा होने वाली बिजली भी महंगी हो जाएगी। रसोई गैस सिलेंडर और पाइप के जरिये घरों में आने वाली रसोई गैस (पीएनजी) भी महंगी होगी। किसानों को फर्टिलाइजर (रासायनिक खाद) की ज्यादा कीमत देनी होगी।

उद्योग की भी लागत बढ़ेगी क्योंकि मैन्यूफैक्चरिंग (निर्माण) और प्रोडक्शन (उत्पादन) के लिए उन्हें अब महंगी गैस खरीदनी होगी। जाहिर है उद्योग लागत में आई बढ़ोतरी उपभोक्ताओं से वसूलेंगे। ग्राहकों को चीजें महंगी मिलना तय है। यानी महंगी गैस का चौतरफा असर होगा। लिहाजा गैस की कीमतें बढ़ाने से पहले अधिकारियों को इस पहलू पर अच्छी तरह गौर करना होगा।’

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