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25 हजार मेगावाट बिजली के लिए गैस प्राइस पूलिंग का प्रस्ताव

Fri, 22 Aug 2014 09:26 PM IST
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली Updated Fri, 22 Aug 2014 09:26 PM IST
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gas price pooling Proposess for 25 thousand MW electricity

ठप पड़ी गैस आधारित बिजली परियोजनाओं को गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू गैस और आयातित एलएनजी की प्राइस पुलिंग (औसत मूल्य तय करने की व्यवस्था) को सहमति दे दी है। गैस आपूर्ति नहीं होने के चलते 25,000 मेगावाट उत्पादन क्षमता के गैस आधारित बिजली संयंत्र ठप पड़े हैं। बिजली की कमी को दूर करने के मद्देनजर पेट्रोलियम मंत्रालय की कोशिश गैस की प्राइस पुलिंग को प्रभावी बनाने की है।

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हालांकि सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम मंत्रालय इस प्रस्ताव को उसी स्थिति में कैबिनेट के समक्ष पेश करेगा, जब उसे ऊर्जा मंत्रालय से इस बाबत सकारात्मक संकेत मिल जाता है। पूर्व में ऊर्जा मंत्रालय गैस कीमतों में 5 डॉलर प्रति एमएमबीटूयी से अधिक मूल्यवृद्धि का पुरजोर विरोध कर चुका है। ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि गैस की कीमतें इससे अधिक होती हैं तो यह अव्यवहारिक होगा और इसका असर बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी के रूप में दिखाई देगा।
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पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि गैस की कमी का बिजली उत्पादन पर प्रतिकूल असर हो रहा है। इसलिए सभी के हितों के अनुरूप इसका समाधान निकालना होगा। बिजली आपूर्ति की स्थिति बेहतर बनाने के लिए गैस प्राइस पुलिंग एक व्यावहारिक विकल्प है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक गैस कीमतों के निर्धारण की यह व्यवस्था ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता पर निर्भर करेगा, जिसमें वह उपभोक्ताओं को वहन करने योग्य कीमत पर गैस उपलब्ध कराने में सक्षम हो।
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पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि बिजली परियोजनाओं को गैस आपूर्ति बढ़ाने के लिए गैस प्राइस पुलिंग एक रास्ता है लेकिन इसके प्रति सतर्क रहना होगा, क्योंकि प्राइस पुलिंग के परिणामस्वरूप गैस की ऊंची कीमतें ऊर्जा सेक्टर को हतोत्साहित कर सकती हैं। इसके मद्देनजर पेट्रोलियम मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि ऊर्जा मंत्रालय को गैस आधारित बिजली संयंत्रों से एक तय अनुपात में बिजली खरीदारी को अनिवार्य करना चाहिए।

आरएलएनजी के इस्तेमाल के प्रति ऊर्जा सेक्टर की अनिच्छा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घरेलू गैस की भारी कमी के बावजूद 2013-14 में आयातित गैस का बमुश्किल उपयोग हुआ। इसलिए, अहम सवाल यह है कि अब जब पेट्रोलियम मंत्रालय गैस प्राइस पुलिंग के प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है, तो क्या ऊर्जा मंत्रालय इसे स्वीकार करेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की गणना बताती है कि आरएलएनजी की लागत उत्तर प्रदेश में 20.34 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू और मध्य प्रदेश व गुजरात में 20.92 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू बैठती है। इस लागत में एफओबी दरें, शिपिंग चार्ज, टैक्स एवं ड्यूटी, ट्रांसमिशन चार्ज और मार्केटिंग मार्जिन शामिल है।

ऊर्जा मंत्रालय की ओर से की गई हालिया कवायद से स्पष्ट है कि यदि गैस आधारित बिजली संयंत्रों को कोल आधारित संयंत्रों के साथ प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सब्सिडी दी जाती है, तो सरकारी खजाने पर 56,149 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बोझ पड़ेगा। यह कवायद जून 2014 में की गई। इसमें मंत्रालय ने आयातित आरएलएनजी के साथ घरेलू गैस की पुलिंग के बाद गैस संयंत्रों को 50 फीसदी प्लांट लोड फैक्टर पर चलाने के लिए सब्सिडी की वित्तीय जरूरतों की गणना की। सब्सिडी कंपोनेंट की गणना अगस्त 2014 से मार्च 2016 तक 5.50 रुपये प्रति यूनिट की एक सांकेतिक दर पर की गई है। इसके तहत अगस्त 2014 से मार्च 2015 तक कुल कुल 52.31 एमएमएससीएमडी (घरेलू और आयातित गैस) गैस की आवश्यकता पूरी करने पर 20,773 करोड़ रुपये सब्सिडी देनी पड़ेगी।


यह पहली बार नहीं है जब सरकार ठप पड़े गैस संयंत्रों को गैस आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए गैस प्राइस पुलिंग पर सब्सिडी उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। इससे पहले अक्तूबर 2013 में एक सीसीईए (आर्थिक मामलों की मंत्री परिषद) नोट गैस प्राइस पुलिंग पर सब्सिडी उपलब्ध कराने के लिए कैबिनेट की अनुमति के लिए लाया गया था।

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