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गैस कीमतें ज्यादा बढ़ाने के खिलाफ पीएमओ
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
Updated Wed, 01 Oct 2014 08:56 AM IST
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गैस कीमतों के मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें सीधे तौर पर दखल दे दिया है। इसके तहत अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) न केवल इस मामले को देख रहा है, बल्कि उसने पेट्रोलियम मंत्रालय को गैस कीमतों को इस तरह निर्धारित करने का स्पष्ट संकेत भी दे दिया है, जिससे लोगों पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़ने पाए।
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पीएमओ ने गैस के दाम (बेस प्राइस) 4.2 डॉलर (करीब 258 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू (मिलियन मेट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट) रखने का संकेत दिया है, जबकि मूल्य निर्धारण के तयशुदा फार्मूले और गणनाओं के आधार पर गैस की नई कीमत 6 डॉलर से 6.5 डॉलर (करीब 400 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू तक बैठ सकती है। कीमतों के साथ ही पीएमओ ने बिजली और उर्वरक कंपनियों के लिए गैस प्राइस पूलिंग को लेकर भी अपने रुख से मंत्रालय को अवगत करा दिया है।
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गैस कीमतें तय करने के लिए गठित सचिवों की समिति द्वारा हाल ही में अपनी सिफारिशें सौंपे जाने के बाद भी पीएमओ और पेट्रोलियम मंत्रालय गैस के दाम खुद तय करने का जिम्मा खुद संभाल रखा है और फिलहाल इस पर काम चल रहा है। नई गैस कीमतें 15 नवंबर तक तय हो जाने की उम्मीद है।
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मामले से जुड़े सूत्रों का बताना है कि पीएमओ और मंत्रालय ने 6.5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की बेस कीमत पर विचार करके पाया कि इसमें सेवा कर, मूल्य वर्धित कर (वैट) और केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) आदि को जोड़ने पर कीमत 7.98 डॉलर (करीब 491 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू तक बैठेगी। ऐसा होने पर इस बात के स्पष्ट संकेत जाएंगे सरकार गैस के दाम 8 डॉलर (करीब 493 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू के स्तर पर रखना चाहती है।
इसे देखते हुए गैस कीमतों को ज्यादा स्वीकार्य तरीके से तय करने पर काम चल रहा है। इसके तहत मौजूदा भंडारों से निकली गैस के दाम 4.2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू और नए क्षेत्रों से निकली गैस के दाम 6.5 डॉलर (400 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू रखने का प्रस्ताव है।
गौरतलब है कि घरेलू स्तर पर गैस का कम उत्पादन और घरेलू और आयातित दोनों ही रूटों से मिल रही गैस की ऊंची कीमतों के चलते फिलहाल देश के ज्यादातर गैस आधारित बिजली संयंत्रों में बिजली का उत्पादन नहीं किया जा पा रहा है। इसे देखते हुए पीएमओ ने गैस की पूल प्राइसिंग के लिए कई तरह की ऐसी गणनाएं सुझाई हैं, जिनसे उपभोक्ताओं पर कीमतों का ज्यादा बोझ न पड़े और गैस की नई कीमतें सभी के लिए स्वीकार्य हों।
ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए गैस कीमतों की पूलिंग के प्रस्ताव को समर्थन मिलता दिख रहा है। क्योंकि इससे ठप पड़े गैस आधारित पावर प्लांटों में उत्पादन शुरू करने की राह आसान हो सकती है। इन संयंत्रों के लिए फिलहाल 21 एमएमएससीएमडी गैस उपलब्ध है, जबकि जरूरत 63 एमएमएससीएमडी की है।
इन प्लांटों को 17.38 डॉलर (करीब 1,070 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू की दर से आरएलएनजी (रिलिक्वीफाइड गैसीफाइड नेचुरल गैस) की आपूर्ति हो रही है, जोकि काफी महंगी है। गैस उत्पादक महंगी कीमतों पर गैस का आयात करने के भी खिलाफ हैं क्योंकि इससे उनकी उत्पादन लागत काफी अधिक हो जाएगी और इस महंगी बिजली के लिए उन्हें बाजार में खरीदार नहीं मिलेंगे।