अब दाल पर भी लगा 4 फीसदी टैक्स का तड़का
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महंगाई से जूझ रहे लोगों को अगले महीने से सरकार ने एक बड़ी चोट दी है।
शासनादेश जारी करने की आपाधापी में सरकारी मशीनरी ने आम आदमी को ऐसा झटका दिया है जिसका असर हर घर की रसोई पर दिखेगा।
सभी प्रकार की दालों, मटर के बेसन को चार फीसदी टैक्स के दायरे में शामिल किया गया है जबकि चने की दाल से बना बेसन एक प्रतिशत कर दायित्व के दायरे में रखा गया है।
सबसे बड़ी चूक ये हैं कि हिंदी व अंग्रेजी भाषा में दायित्व निर्धारण के दायरे में वस्तुओं को अलग-अलग दिखाया गया है।
हर साल मई में वित्त, कर एवं निबंधन अनुभाग टैक्स को लेकर पूरी लिस्ट जारी करता है। 23 मई 2013 को प्रमुख सचिव (संस्थागत वित्त) बीरेश कुमार ने शासनादेश जारी किया है।
अनुसूची दो में भाग-क में क्रम संख्या 52 की प्रविष्टियों में दालों व मटर से निर्मित बेसन को शामिल कर दिया गया है। यानी इन पर व्यापारी को चार प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा।
जबकि अंग्रेजी अनुवाद में दाल को हटाकर मटर बेसन को शामिल कर दिया गया है। इन पर अभी तक एक प्रतिशत टैक्स निर्धारित है। इसी प्रकार क्रम संख्या 52 में स्टील के कोरे माल को शामिल किया गया है। इसको लेकर वाणिज्य कर अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
हाईकोर्ट ने बताया हिंदी वर्जन को मान्य
उत्तर प्रदेश टैक्स बार एसोसिएशन के जोनल चेयरमैन एडवोकेट राजीव जौहरी बताते हैं कि वैसे तो विभाग गजट नोटिफिकेशन हिंदी व अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में जारी करता है। लेकिन हाईकोर्ट ने हिंदी अनुवाद को ही मान्यता दी है। साथ ही सभी विभागों को हिंदी अधिसूचना को ही मान्यता देने के निर्देश दिए हैं।
दो से तीन महीने तक लगेगा यही टैक्स
वाणिज्य कर अफसर वैसे तो इस मामले में वर्जन देने को तैयार नहीं है लेकिन इतना जरूर कह रहे हैं कि अगली अधिसूचना जारी होने तक इसी के आधार पर टैक्स वसूला जाएगा।
इसको लेकर टैक्स बार एसोसिएशन व व्यापारिक संगठनों की ओर से एक प्रस्ताव बनकर जाएगा। इसके बाद यदि सरकार इस पर सहमत होगी तो नई अधिसूचना जारी होगी। इसमें दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है।