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पर्यावरण मंजूरी की आवेदन प्रक्रिया होगी डिजिटल

Thu, 19 Jun 2014 01:27 AM IST
Updated Thu, 19 Jun 2014 01:27 AM IST
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Forest clearance will process the application of digital

वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरी की आवेदन प्रक्रिया को सरकार डिजिटल करने जा रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर एवं निवेश परियोजनाओं में तेजी लाने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कवायद के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सभी वन मंजूरी की प्रक्रियाओं का 1 जुलाई से डिजिटाइजेशन करने का फैसला किया है। इसके तहत मंजूरी के लिए आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

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इसके साथ ही आवेदनों की स्थिति जानने के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग सेवा इस साल 1 सितंबर से शुरू कर दी जाएगी। उद्योग संगठन फिक्की की ओर से आयोजित कार्यक्रम ‘ऑप्टिमाइजिंग प्रोजेक्ट क्लीयरेंस फ्रेमवर्क फॉर स्टिम्युलेटिंग इनवेस्टमेंट्स’ में केंद्रीय सचिवालय में अतिरिक्त सचिव (प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप) अनिल स्वरूप ने कहा कि खानों के अन्वेषण के लिए मिली मंजूरियों को इस साल एक नवंबर से ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इन कदमों से उम्मीद है कि निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और पिछले कुछ सालों के दौरान निवेश के गिरते ग्राफ को ऊपर लाने में मदद मिलेगी।
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5,27,299 करोड़ रुपए की योजनाएं

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फिक्की बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को आसान और तर्कसंगत बनाने के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) के साथ मिलकर काम कर रहा है।

अबतक स्वरूप की अगुवाई वाला पीएमजी 5,27,299 करोड़ रुपये की 150 से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी दे चुका है। हालांकि, पीएमजी के पास इस समय 280 से अधिक ऐसी परियोजनाएं के आवेदन पड़े हैं, जिन्हें विभिन्न प्रकार की मंजूरी का इंतजार है।

स्वरूप ने कहा कि पीएमजी नीतिगत मुद्दों पर भी नजर बनाए हुए है। एक बार निवेश परियोजनाओं की आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप में बदलने का काम पूरा हो जाए, तो उसके बाद मंजूरी प्रक्रिया की रि-इंजीनियरिंग और उनकी बाधाएं दूर करने की कवायद शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें भी इस काम में पीएमजी को सहयोग दे रही हैं।

जुलाई के अंत तक ज्यादा निवेश वाले 16 राज्यों में स्थानीय पीएमजी का गठन किया जाएगा। स्वरूप ने उद्योगों से राज्य सरकारों की वेबसाइटों का इस्तेमाल करने की अपील की है। इससे पीएमजी को उद्योगों की दिक्कतें समझने में मदद मिलेगी और उन्हें दूर करने की पहल की जा सकेगी।

नया विधेयक लाने पर किया जाएगा विचार

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खान मंत्रालय में संयुक्त सचिव अरुण कुमार का कहना है कि खनन का अभी तक ठीक ढंग से नियमन नहीं किया गया है और खनन के कानूनी प्रावधानों से अजीबोगरीब परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसके साथ ही इसकी प्रक्रिया भी काफी धीमी और इनमें गति लाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में व्यापक पैमाने पर संशोधनों की आवश्यकता है या नया विधेयक लाने पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस संबंध में उद्योगों से परामर्श किया जाएगा। भूमि संसाधन विभाग में आर्थिक सलाहकार एके गौतम ने उद्योगों से अपने विचार और सुझाव साझा करने की अपील की है, जिससे कि विभाग यह समझ सके कि उद्योगों की मुख्य दिक्कतें क्या हैं।

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ऑनलाइन निगरानी

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नैना लाल किदवई, एचएसबीसी एशिया प्रशांत की निदेशक एवं चेयरमैन, भारत का कहना है कि निवेश मंजूरी की प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को समग्रता से देखा जाए तो पीएमजी का दायरा बढ़ाया जा सकता है और इसकी गुंजाइश भी है।

क्योंकि, मंजूरी की पूरी प्रक्रिया को आसान और तर्कसंगत बनाने की जरूरत है और केंद्र के साथ-साथ राज्यों को भी इस दिशा में कार्य करना होगा। नैना लाल किदवई फिक्की की प्रेसिडेंट भी रह चुकी हैं।

फिक्की इस संबंध में कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिख चुका है। खनिज से संबंधित रियायतों से जुड़े मुद्दों के बारे में रियो टिंटो के लैंड एक्सेस मैनेजर डॉ. एचवाई देसाई ने कहा कि खनन को लेकर कई सारे आर्थिक लाभ जुड़े हैं। सेक्टर को रफ्तार देने के लिए देसाई ने केवल पूर्ण आवेदनों को ही स्वीकार करने और केंद्रीकृत ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था प्रभावी करने का प्रस्ताव दिया।

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