फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   for cheaper loan please wait some more time

सस्ते कर्ज के लिए अभी करना होगा और इंतजार

Tue, 01 Apr 2014 07:51 PM IST
Updated Tue, 01 Apr 2014 07:51 PM IST
विज्ञापन
for cheaper loan please wait some more time

महंगाई कम होने से सस्ते कर्ज की बढ़ी आस को फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पूरा नहीं किया है। आरबीआई ने मंगलवार को रेपो रेट और सीआरआर में कोई बदलाव न करते हुए आम लोगों और उद्योग जगत के इस इंतजार को और लंबा कर दिया है।

विज्ञापन


द्विमासिक आधार पर पेश की गई पहली मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ने अलनीनो और दूसरे कारकों के चलते महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका के चलते ब्याज दरों में कटौती से परहेज किया है।
विज्ञापन


इन परिस्थितियों को देखते हुए रेपो रेट को 8.0 फीसदी और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 4.0 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। प्रमुख दरों में कोई बदलाव न होने से आपके लोन की ईएमआई में भी कोई बदलाव नहीं होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

बाजार को संभालेंगे आरबीआई गवर्नर

for cheaper loan please wait some more time

मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक ने इसके अलावा बैंकिंग सिस्टम में नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए 7 दिन और 14 दिन के टर्म रेपो में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है।

मौद्रिक नीति पेश करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि अलनीनो की वजह से मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका है। साथ ही सब्जियों के उत्पादन में कमी रहेगी। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, ईंधन, उर्वरक और बिजली की कीमतों को लेकर भी अनिश्चितता रहने की संभावना है। इसे देखते हुए महंगाई में कमी आने की संभावना कम है।

महंगाई पर जताई चिंता

for cheaper loan please wait some more time

रिजर्व बैंक के अनुसार इन परिस्थितियों में जनवरी 2015 तक थोक मूल्य सूचकांक 8.0 फीसदी के स्तर पर तक पहुंचने को लेकर भी अनिश्चितता है।

राजन के अनुसार रिजर्व बैंक महंगाई कम करने की नीति पर पूरी तरह से काम कर रहा है। ऐसे में ब्याज दरों में कोई बदलाव न करना पूरी तरह से युक्तिसंगत है।

रिजर्व बैंक ने जनवरी 2014 तक थोक मूल्य सूचकांक 8.0 फीसदी और साल जनवरी 2016 तक 6.0 फीसदी आने का लक्ष्य रखा है।

विकास दर 5-6 फीसदी रहने का अनुमान

for cheaper loan please wait some more time

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2013-14 में विकास दर पांच फीसदी से कम रहने के आसार देखते हुए नए वित्त वर्ष (2014-15) में जीडीपी की दर 5-6 फीसदी के दायरे में रहने की संभावना है। वह भी बहुत हद तक घरेलू स्तर पर मौजूद अवरोधों के हटने, अटकी हुई परियोजनाओं में तेजी और निर्यात में बढ़ोतरी पर निर्भर करेगा।

रिजर्व बैंक के अनुसार चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2014-15 में जीडीपी के 2.0 फीसदी के स्तर पर रहने का अनुमान है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed