तीन साल में घाटा कम कर देंगे : जेटली

ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 11 Jul 2014 08:45 AM IST
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fm arun jaitley will decrease the deficit in three years

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के बढ़ते घाटे पर लगाम कसने के लिए सख्त लक्ष्य तय किए हैं। उन्होंने चालू वित्त वर्ष के लिए पिछली सरकार के तय लक्ष्य 4.1 फीसदी को चुनौतीपूर्ण मानते हुए उसे पूरा करने की बात कही है। वित्त मंत्री के अनुसार सरकार अगले तीन साल में राजकोषीय घाटा कम कर 3.0 फीसदी पर लाएगी। साल 2015-16 में घाटे को 3.6 फीसदी और साल 2016-17 में 3.0 फीसदी पर लाया जाएगा।
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जिओजीत कॉमट्रेड लिमिटेड के चीफ करेंसी स्ट्रेटजिस्ट हेमल दोशी के अनुसार बजट सही दिशा में अर्थव्यवस्था को ले जाने के लिए तैयार किया गया है। इस साल के लिए राजकोषीय घाटे को 4.1 फीसदी रखना और साल 2016-17 तक 3.0 फीसदी पर लाने का लक्ष्य से साफ है कि सरकार अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के साथ राजकोषीय समेकन पर जोर देना चाहती है।


सब्सिडी बिल में बढ़ोतरी
साल 2014-15 के लिए सरकार ने सब्सिडी बिल में 2.47 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इस साल 2.51 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी बिल का प्रावधान किया गया है। जबकि, साल 2013-14 में 2.45 लाख करोड़ रुपये का सब्सिडी बिल रहा था। इस साल उर्वरक सब्सिडी के लिए 72,970 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, खाद्य सब्सिडी के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये के प्रावधान को बरकरार रखा गया है। वहीं पेट्रोलियम सब्सिडी कम कर 63,426 करोड़ रुपये का आवंटन है।

विनिवेश से जुटाएंगे 58,425 करोड़ रुपये
सरकार इस साल सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 58,425 करोड़ रुपये जुटाएगी। इसके तहत पीएसयू में हिस्सेदारी बेचकर 43,425 करोड़ रुपये और 15,000 करोड़ रुपये सरकारी कंपनियों में बची हिस्सेदारी को बेचकर सरकार जुटाएगी। अंतरिम बजट में सरकार ने 51,925 करोड़ रुपये पूंजी जुटाने का लक्ष्य रखा था।

साल के अंत तक आ जाएगा जीएसटी

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को इस साल के अंत तक लागू करने की बात कही है। जेटली ने कहा साल के अंत तक जीएसटी का रोडमैप तैयार कर लिया जाएगा। जीएसटी को लागू करने का मुख्य उद्देश्य केंद्र व राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले ज्यादातर अप्रत्यक्ष करों को समाहित करके कर प्रणाली को सरल बनाना व कर वसूली बढ़ाना है। जीएसटी बिल को यूपीए सरकार ने 2011 में लोकसभा में पेश किया था।

अब और रेट्रोस्पेक्टिव कर नहीं लगेंगे
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में कहा कि कर कानूनों में रेट्रोस्पेक्टिव संशोधनों को अत्यधिक सावधानी के साथ लिया जाएगा और 2012 की पिछली अवधि से लागू संशोधनों से उत्पन्न सभी नए मामलों पर कार्रवाई शुरू करने से पहले उनकी जांच सीबीडीटी की उच्च स्तरीय समिति करेगी। जेटली ने कहा कि सरकार स्थायी कराधान प्रणाली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वोडाफोन टैक्स मामले, जिसके चलते भारत के टैक्स कानून और उसकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े हुए, का बिना उल्लेख किए जेटली ने कहा कि मौजूदा टैक्स विवाद आयकर कानून 1961 के पिछली अवधि से लागू संशोधनों के चलते हुए हैं और वह न्यायालय में लंबित हैं। हमें इन विवादों के तर्कसंगत समाधान पर पहुंचना होगा। यानी, वोडाफोन कर मामले को लेकर अभी कानूनी उलझनें बरकरार रहेंगी।

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