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प्याज, आलू के बाद अब आटे ने छुआ आसमान

Wed, 20 Nov 2013 12:09 AM IST
अजीत सिंह/अमर उजाला, दिल्ली
अजीत सिंह/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 20 Nov 2013 12:09 AM IST
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flour prices rise

फल, सब्जियों और दूध के बाद अब महंगाई में आटा गीला होने की बारी है। कंपनियां ब्रांडेड आटा 310 रुपए प्रति 10 किग्रा के एमआरपी पर बेचने लगी हैं, जबकि नॉन-ब्रांडेड आटा भी 21-22 रुपए प्रति किग्रा से ऊपर बिक रहा है।

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हालांकि सरकारी गोदाम गेहूं से भरे हैं, लेकिन फ्लोर मिलों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। इसके चलते आटा महंगा होने लगा है।

यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राम चंद्र सिंघल ने बताया कि गेहूं की महंगी खरीद के चलते फ्लोर मिलों को आटे के भाव बढ़ाने पड़ रहे हैं। एफसीआई से गेहूं की खरीद 1,700 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बैठ रही है। इसी वजह से नॉन-ब्रांडेड आटा भी अब 21-22 रुपए किग्रा बिकने लगा है।
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ब्रांडेड आटे से जुड़ी एक प्रमुख फूड कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पिछले दो-तीन हफ्तों में गेहूं के दाम 80 से 100 रुपए क्विंटल तक बढ़े हैं। इसके बावजूद गेहूं की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। अधिकांश कंपनियां पिछले एक महीने में आटे के दाम 5-10 फीसदी तक बढ़ा चुकी हैं।
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सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो गेहूं की थोक महंगाई अक्तूबर के दौरान करीब 8 फीसदी बढ़ चुकी है। जबकि अनाज व इसके उत्पादों की खुदरा महंगाई 12 फीसदी बढ़ी है। सरकारी गोदामों में 360 लाख टन से ज्यादा गेहूं जमा है और सरकार के लिए गोदाम खाली करना चुनौती बना हुआ है। इसके बावजूद दो जून की रोटी महंगाई की आग में जल रही है।

गेहूं से दोगुना आटे का भाव
खाने-पीने की चीजों की महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है, लेकिन किसान इसके लाभ से अभी भी वंचित हैं। पिछले रबी सीजन में केंद्र ने जिस गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,350 रुपए प्रति क्विंटल तय किया था, अब उसी गेहूं का आटा 22-27 रुपये प्रति किग्रा में बिक रहा है। कुछ ब्रांडेड आटे के दाम तो 40-45 रुपए किग्रा तक हैं। गेहूं में आई हाल की तेजी का फायदा भी किसानों की बजाय बिचौलिए उठा रहे हैं।


गेहूं की बुवाई 10 फीसदी गिरी
यूपी में अभी तक चीनी मिलें नहीं चलने से गेहूं की बुवाई अटक गई है। पंजाब में भी किसानों का रुझान गेहूं के बजाय दूसरी फसलों की ओर बढ़ा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब 10 फीसदी कम है।

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