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ई-कॉमर्स कंपनी के फ्लॉप शो से बिगड़ा बाजार का खेल

Wed, 08 Oct 2014 10:53 AM IST
Updated Wed, 08 Oct 2014 10:53 AM IST
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flop show by e commerce companies create huge problem for online shopping sector.

ऑनलाइन शॉपिंग के फेस्टिव ऑफरों को लेकर बड़ी संख्या में सामने आ रही ग्राहकों की शिकायतों और उत्पादों के दाम बढ़ा कर छूट देने के आरोपों के बाद अब इस क्षेत्र की संस्था ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओवीएओआई) ने भी इसके खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है।

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ओवीएओआई का कहना है कि पिछले एक-दो दिनों में ई-कॉमर्स वेबसाइटों के फेस्टिव ऑफरों में जिस तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं वह ऑनलाइन चैनल की छवि को खराब करने वाली हैं।
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साथ ही इससे ऑफलाइन माध्यमों को भी नुकसान पहुंच रहा है, जिसके जरिए अब भी देश की करीब 90 फीसदी आबादी खरीदारी करती है।

ओवीएओआई ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि हाल के दिनों में ई-रिटेलरों द्वारा पेश और बढ़-चढ़ कर प्रचारित किए गए ‘बिग बिलियन डे’ जैसे ऑफरों को लेकर सामने आई शिकायतों ने ई-कॉमर्स और और ऑनलाइन चैनलों की विश्वसनीयता को काफी नुकसान पहुंचाया है।
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फ्लॉप शो साबित होने से बढ़ी चिंता

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ओवीएओआई के कनवेनर राहुल सूरी ने कहा कि ऑनलाइन वेंडर ई-रिटेल स्टोरों के जरिए अपने उत्पादों की बढ़ती बिक्री को देख कर खुश हो सकते हैं, पर ऑनलाइन सेल ऑफरों की गड़बड़ियां इस पूरे कारोबार को धक्का पहुंचाने वाली हैं।

सोमवार को एक शॉपिंग पोर्टल द्वारा पेश ऑफर के ‘फ्लॉप शो’ साबित होने के बाद यह चिंता और भी गहरी हो गई है। दीर्घ कालीन नजरिए से देखें तो, ऐसी घटनाएं दुकानों के जरिए परंपरागत ढंग से की जाने वाली करीब 90 फीसदी बिक्री को भी नुकसान पहुंचाने वाली हैं।

ओवीएओआई के मुताबिक ई-पोर्टलों की इस तरह की हरकतों से देश में डॉट कॉम का गुब्बारा एक बार फिर से फूट सकता है और इस बार और इस बार हवा निकलेगी ई-कॉमर्स कारोबार की।

दोनों तरह के कारोबारियों को हो रहा नुकसान

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एसोसिएशन का कहना है कि ई-कॉमर्स पोर्टलों को इस तरह के फर्जीवाडे़ करने के बजाय असली ई-कॉमर्स पर ध्यान देना चाहिए। इसके तहत वह भारत में बने (मेड इन इंडिया) उत्पादों को दुनिया भर में बेच सकते हैं, जैसा कि कई विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां अभी कर रही हैं।

ई-कॉमर्स को लेकर फिलहाल देश में सरकार की ओर से कोई खास पाबंदियां या कानूनी बाध्यताएं नहीं हैं। ऐसे में ई-स्टोर्स पर बेची जा रही चीजों की कीमतों में भारी असमानता देखने को मिल रही है।

गैरवाजिब कीमतों पर की जा रही यह बिक्री ऑनलाइन स्टोरों के साथ पारंपरिक दुकानदारों को भी नुकसान पहुंचा रही है। आज के दौर में हर किसी के पास मोबाइल है और वह दुकानों पर जाकर ऑनलाइन स्टोरों के ऑफरों की कीमतों को दिखाते हैं, जो कि वाजिब नहीं होतीं।

इस तरह इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के कारोबारों को नुकसान पहुच रहा है। ऑनलाइन चैनलों को ऐसे तरीके अपनाने के बजाय वास्तविक कीमतों पर उत्पाद बेचने चाहिए। वह ग्राहकों को घर तक मुफ्त में सामान पहुंचाने की सुविधा (फ्री होम डिलिवरी) के जरिए जरूर आकर्षित कर सकते हैं।

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