5 बातों पर दो ध्यान, लगेगा रुपयों का पेड़
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कमाई का एक हिस्सा भविष्य की जरूरतों जैसे कि बच्चों की शिक्षा, शादी, रिटायरमेंट आदि के लिए बचाना या निवेश करना भी जरूरी है। इसलिए, बेहतर फाइनेंशियल लाइफ के लिए जरूरी है कि बजटिंग पहले और प्राथमिकता के आधार पर कर ली जाए।
इसकी शुरुआत नए साल के पहले महीने से ही कर देनी चाहिए। दरअसल, बजटिंग का तात्पर्य आमदनी कितनी है और किस मद में कितना खर्च करना और कितना बचाना व निवेश करना है, इसकी योजना बनाने से है। बजटिंग से हमें तय सीमा में खर्च करने की आदत पड़ जाती है।
इंश्योरेंस कवरेज है सबसे जरूरी
इंश्योरेंस को एक अनिवार्य जरूरत समझें। बीमा पॉलिसी लेने की मुख्य उद्देश्य निवेश नहीं बल्कि सुरक्षा है। इसलिए वहीं बीमा पॉलिसी लेनी चाहिए जिसमें पॉलिसी धारक को अच्छा इंश्योरेंस कवरेज (सम एश्योर्ड राशि) मिले। बहुत से नौजवान टैक्स बचाने के उद्देश्य से बीमा पॉलिसी लेते हैं।
टैक्स सेविंग, चाइल्ड फ्यूचर, पेंशन प्लानिंग आदि सेकेंडरी होनी चाहिए। कभी भी बीमा और निवेश को मिलाकर अपने निवेश पोर्टफोलियो को पेंचीदा मत बनाइए। पर्याप्त जीवन बीमा, हेल्थ इंश्योरेंस, दुर्घटना बीमा होना जरूरी है। इसके बाद बचत और निवेश पर ध्यान देना चाहिए।
लक्ष्य ध्यान में रखकर निवेश
आप जब भी निवेश के बारे में सोचें, सबसे पहले यह तय कर लें कि यह निवेश क्यों और किस लिए करने जा रहे हैं। निवेश का लक्ष्य क्या है।
यदि आपके पास कोई लक्ष्य नहीं है, तो बेहतर यही होगा कि कुछ समय तक इंतजार करें। जब लक्ष्य तय कर लें तब निवेश की शुरुआत करें। पहले लक्ष्य तय करने से निवेश सही समय पर सही दिशा में किया जा सकता है।
अप्रैल में ही टैक्स प्लानिंग
अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारियों को अप्रैल में यह पता चल जाता है कि उन्हें कितनी वेतनवृद्धि मिल सकती है और उन्हें आने वाले महीनों में बोनस मिलेगा या नहीं। यानी, अप्रैल-मई में आमदनी में कितनी बढ़ोतरी होने जा रही है, इसका ब्योरा आपको मिल जाता है।
इससे, वेतनभोगी कर्मचारी के लिए अप्रैल में ही आने वाले साल के लिए आवश्यक टैक्स सेविंग की गणना संभव जाती है। इसलिए, टैक्स प्लानिंग अप्रैल में कर लेनी चाहिए, मार्च तक का इंतजार करने में कोई समझदारी नहीं है। इससे अंतिम महीनों में टैक्स बचाने के लिए जल्दबाजी में अव्यावहारिक और अनुपयुक्त प्रोडक्ट खरीदने से भी बच जाएंगे।
क्रेडिट कार्ड से जितना संभव परहेज
इससे बचने का सबसे सरल उपाय यह है कि जहां तक संभव हो क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से बचा जाए। यदि आप पहले से क्रेडिट कार्ड के चलते कर्ज में फंस गए हैं, तो सबसे पहले उनका निपटारा कर लें।