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फिच ने जीडीपी अनुमान घटाकर किया 6 फीसदी
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Sat, 29 Sep 2012 01:36 AM IST
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सरकार के देश की अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के दावों पर साख निर्धारण करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को भरोसा नहीं है। रेटिंग एजेंसी फिच ने वर्ष 2012 के लिए भारत के जीडीपी के अनुमान को घटाकर 6 फीसदी कर दिया है। पहले यह अनुमान 6.5 फीसदी था।
साख निर्धारण करने वाली एक अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने मौजूदा वर्ष के भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान को पहले के 6.5 फीसदी की तुलना में 1 फीसदी घटाकर 5.5 फीसदी प्रतिशत कर दिया है। स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने इसी वर्ष अप्रैल में भारत की साख को स्थिर से घटाकर नकारात्मक किया था।
ग्लोबल अर्थव्यवस्था की खराब होती स्थिति के साथ ही ढुलमुल घरेलू नीतियों और मजबूत इच्छा शक्ति का अभाव आड़े आने का हवाला देते हुए फिच ने अनुमान में कमी की है। फिच ने चीन का जीडीपी अनुमान भी आठ प्रतिशत से घटाकर 7.8 प्रतिशत कर दिया है।
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भारत का आर्थिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 2012 की दूसरी तिमाही में देश में निवेश पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मात्र 0.7 प्रतिशत बढ़ा है। तीसरी तिमाही में भी निवेश के कमजोर बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार की आर्थिक एवं निवेश नीति को लेकर व्याप्त आशंकाओं का बुरा असर कारोबारी विश्वास माहौल पर पड़ रहा है। उच्च महंगाई दर, वित्तीय घाटा और सरकारी कर्ज भारत को नीतियों को उदार बनाने से रोक रहा है।
फिच ने इसके साथ ही चालू वित्तवर्ष में देश का साधारण सरकारी घाटा जीडीपी के 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। उसने कहा है कि कई कारणों से निवेश कमजोर पर रहा है जिससे आर्थिक क्षमता प्रभावित हो रहा है, जो विकास अनुमान के कमजोर पड़ने का संकेत है। हाल में सरकार द्वारा एफडीआई से जुड़ी की गई घोषणाएं कारोबारी भरोसा जगाने और निवेश बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि एजेंसी ने कहा है कि राजनीति उठापटक भी आर्थिक माहौल पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। गौरतलब है कि चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में एक तिमाही पहले के 5.3 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा सुधार नजर आया था और यह 5.5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी थी। इससे पहले क्रेडिट सुईस जीडीपी के अनुमान को 6.5 प्रतिशत से कम कर छह प्रतिशत कर चुका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने भी आर्थिक विकास अनुमान को 6.2 प्रतिशत से कम कर 5.4 प्रतिशत किया है।
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साख निर्धारण करने वाली एक अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने मौजूदा वर्ष के भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान को पहले के 6.5 फीसदी की तुलना में 1 फीसदी घटाकर 5.5 फीसदी प्रतिशत कर दिया है। स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने इसी वर्ष अप्रैल में भारत की साख को स्थिर से घटाकर नकारात्मक किया था।
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ग्लोबल अर्थव्यवस्था की खराब होती स्थिति के साथ ही ढुलमुल घरेलू नीतियों और मजबूत इच्छा शक्ति का अभाव आड़े आने का हवाला देते हुए फिच ने अनुमान में कमी की है। फिच ने चीन का जीडीपी अनुमान भी आठ प्रतिशत से घटाकर 7.8 प्रतिशत कर दिया है।
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भारत का आर्थिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 2012 की दूसरी तिमाही में देश में निवेश पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मात्र 0.7 प्रतिशत बढ़ा है। तीसरी तिमाही में भी निवेश के कमजोर बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार की आर्थिक एवं निवेश नीति को लेकर व्याप्त आशंकाओं का बुरा असर कारोबारी विश्वास माहौल पर पड़ रहा है। उच्च महंगाई दर, वित्तीय घाटा और सरकारी कर्ज भारत को नीतियों को उदार बनाने से रोक रहा है।
फिच ने इसके साथ ही चालू वित्तवर्ष में देश का साधारण सरकारी घाटा जीडीपी के 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। उसने कहा है कि कई कारणों से निवेश कमजोर पर रहा है जिससे आर्थिक क्षमता प्रभावित हो रहा है, जो विकास अनुमान के कमजोर पड़ने का संकेत है। हाल में सरकार द्वारा एफडीआई से जुड़ी की गई घोषणाएं कारोबारी भरोसा जगाने और निवेश बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि एजेंसी ने कहा है कि राजनीति उठापटक भी आर्थिक माहौल पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। गौरतलब है कि चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में एक तिमाही पहले के 5.3 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा सुधार नजर आया था और यह 5.5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी थी। इससे पहले क्रेडिट सुईस जीडीपी के अनुमान को 6.5 प्रतिशत से कम कर छह प्रतिशत कर चुका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने भी आर्थिक विकास अनुमान को 6.2 प्रतिशत से कम कर 5.4 प्रतिशत किया है।