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सुरसा की तरह बढ़ रहा है राजकोषीय घाटा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2013 12:07 AM IST
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राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की तमाम कोशिशों के बावजूद यह तेजी से बढ़ रहा है।
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चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में देश का राजकोषीय घाटा बढ़कर 3.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है जो इस साल के तय लक्ष्य का करीब 63 फीसदी है। इसे देखते हुए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.8 फीसदी तक सीमित रखना और मुश्किल हो जाएगा।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम राजकोषीय घाटे को किसी भी सूरत में 4.8 फीसदी की लाल रेखा से ज्यादा न बढ़ने देने का दावा करते रहे हैं।
कंट्रोलर जनरल ऑफ एकाउंट्स (सीजीए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की समान अवधि में राजकोषीय घाटा बजट लक्ष्य का 51.5 फीसदी था।
तब साल के आखिरी महीनों में सरकारी खर्चों में भारी कटौती के बाद सरकार किसी तरह इसे 4.9 फीसदी तय सीमित रखने में कामयाब रही थी।
शुरुआती चार महीनों में राजकोषीय घाटा बढ़ाने के पीछे सरकार का योजनागत व्यय बढ़ना प्रमुख वजह रहा है। जबकि सालाना लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 16.4 फीसदी राजस्व ही जुटा गया है।
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