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भले ही दवा कड़वी हो मगर इलाज जरूरी: यशवंत सिन्हा

Sun, 24 Feb 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 24 Feb 2013 12:05 AM IST
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first priority is to control inflation said yashwant sinha

अगर मैं वित्त मंत्री होता तो मौजूदा स्थितियों में कैसा बजट बनाता? यह सवाल ऐसा है जैसे आप किसी मरीज को गलत डॉक्टर को दिखा कर उसे मरणासन्न बना दें और फिर पूछें कि अब इसे कैसे ठीक करें? लेकिन पांच बजट पेश करने वाले अकेले गैर-कांग्रेसी व्यक्ति होने के नाते मैं कह सकता हूं कि हमने गंभीर चुनौतियों का दृढ़ इच्छा शक्ति से सामना किया। इस समय अर्र्थव्यवस्था को सही इलाज की जरूरत है। भले ही दवा कड़वी क्यों न हो।

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आज अर्थव्यवस्था की समस्याएं सरकारी खर्च बेहिसाब बढ़ने के कारण हैं। इसकी शुरुआत 2008 से हुई। उस साल भी चुनाव के पहले का अंतिम बजट था और इस साल भी ऐसा ही है। लेकिन मैं मौजूदा हालात में कठोर कदमों के पक्ष में हूं। मेरी पहली कड़वी दवा सरकारी खर्च में कटौती होगी। विदेशी मुद्रा भंडार को छोड़ आज की स्थिति 1991 से भी बदतर है। जरूरत है जीरो बजटिंग के सिद्धांत पर काम करने की। मनरेगा सहित तमाम योजनाओं की समीक्षा कर फिजूलखर्च रोकना होगा।
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मैं खाद्य सुरक्षा के नाम पर खर्च बढ़ाने के खिलाफ हूं। अजीब विरोधाभास है। हम 8 करोड़ टन अनाज के भंडार पर बैठे हैं। लेकिन खाद्य वस्तुओं की महंगाई से आम आदमी त्रस्त है। मुफ्त अनाज बांटने से कोई देश तरक्की नहीं कर सकता। महंगाई की मार से आम आदमी को बचाने केलिए आपूर्ति बढ़ाना जरूरी है।
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महंगाई पर काबू पाना पहली प्राथमिकता है। इससे ब्याज दरें घटेंगी और निवेश बढ़ेगा। जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। आम आदमी के घर के सपने को हमने पूरा किया था। कर छूट प्रावधान किया था। लेकिन होम लोन के ब्याज पर आयकर छूट अब भी डेढ़ लाख रुपये ही है। इसे बढ़ाने की जरूरत है।

आय कर छूट सीमा अब बढ़कर तीन लाख रुपये होनी चाहिए। आय कर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत बचत और निवेश सीमा भी बढ़ाकर मैं तीन लाख रुपये करना चाहूंगा। असल में नौ से दस फीसदी की जीडीपी विकास दर के लिए हमें 37 फीसदी की बचत दर चाहिए। जो अभी 29 फीसदी है। बचत को प्रोत्साहन जरूरी है। इसलिए कर छूट निवेश सीमा को बढ़ाना जरूरी है। ‘सुपर रिच’ पर अलग कर लगाने के पक्ष में मैं नहीं हूं।

कृषि में किसान को जब तक पैसा और पानी नहीं मिलेगा, उसकी हालत नहीं सुधरेगी। मैंने किसान क्रेडिट कार्ड की शुरुआत की। मैं चाहूंगा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की तर्ज पर प्रधानमंत्री सिंचाई योजना शुरू हो। नदियों को जोड़ने की योजना कृषि में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। भंडारण में भी हमारी सोच है कि इसे विकेंद्रित किया जाए। पंचायत स्तर पर भंडार हों। प्याज जैसी फसलों केलिए भंडारण की विशेष व्यवस्था भी हो।

सबसे पहले महंगाई पर काबू करने की जरूरत है। फिर सरकारी निवेश के जरिये बड़ी ढांचागत परियोजनाओं पर काम शुरू किया जाए और यह निवेश निजी निवेश को प्रोत्साहित करेगा तो अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। इस तरह के हालत का सामना हमने 1998 में भी किया था।


यूपीए ने किया बंटाधार
यूपीए सरकार ने जिन क्षेत्रों को बर्बाद किया, उनमें ऊर्जा प्रमुख है। कोयला और ऊर्जा मंत्रालय आपस में झगड़ रहे हैं। बिजली कंपनियां को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। ऊर्जा क्षेत्र की हालत दुरुस्त करने पर तुरंत काम करने की जरूरत है। अर्थव्यवस्था में घरेलू और विदेशी निवेशकों के भरोसे का संकट भी है। इसे लौटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।

- हरवीर सिंह से बातचीत पर आधारित

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