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जेट-ऐतिहाद सौदे को एफआईपीबी की मंजूरी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2013 09:27 PM IST
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विवादों में फंसी जेट-ऐतिहाद डील को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है।
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सिविल एविएशन की सबसे बड़ी एफडीआई डील पर अब कैबिनेट की मुहर लगनी बाकी है।
करीब 37.9 करोड़ डॉलर के निवेश के बाद जेट की 24 फीसदी हिस्सेदारी अबू धाबी की ऐतिहाद एयरलाइंस को मिलेगी। फिर भी वीटो पावर जेट प्रोमोटर नरेश गोयल के पास होगी और जेट का मुख्यालय अबू धाबी शिफ्ट नहीं होगा। प्रोमोटर्स और प्रभावी नियंत्रण पर स्थिति साफ करने के बाद ही इस सौदे को मंजूरी मिली है।
सोमवार को एफआईपीबी की बैठक के बाद आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने बताया कि जेट-ऐतिहाद के प्रस्ताव को मंजूरी कुछ शर्तों के साथ दी गई है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जेट का नियंत्रण विदेशी हाथों में जाने से रोकने के लिए चार प्रमुख शर्तें लगाई गई हैं।
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ऐतिहाद के साथ मौजूदा शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट में बदलाव के लिए जेट को भारत सरकार की अनुमति लेनी होगी। किसी भी प्रकार के विवाद का निपटारा भारतीय कानूनों के तहत किया जाएगा। अगर दोनों कंपनियों शर्तों पर राजी हो जाती हैं तभी प्रस्ताव को कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) के पास भेजा जाएगा।
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नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा है कि कुछ मामूली बदलाव के साथ जेट-ऐतिहाद के प्रस्ताव को एफआईपीबी की मंजूरी मिल गई है। विवादों से बचने के लिए हाल ही जेट ने शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट में कुछ बदलाव किए हैं।
ऐतिहाद अपने निदेशकों की संख्या तीन से घटाकर दो करने पर राजी हो गया है। जबकि, अहम फैसलों में प्रोमोटर्स नरेश गोयल को वीटो पावर मिल गई है। जेट की 24 फीसदी हिस्सेदारी ऐतिहाद को बिकने के बाद 51 फीसदी शेयर प्रोमोटर्स नरेश गोयल के पास रहेंगे जबकि 25 फीसदी हिस्सेदारी अन्य संस्थागत व व्यक्तिगत निवेशकों की होगी।
क्यों था एतराज?
जेट-ऐतिहाद सौदे और अबू धाबी की हवाई सीटें बढ़ाने के समझौते पर सुब्रमण्यम स्वामी समेत कई सांसदों और संसद की स्थायी समिति ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा ऐतराज सिर्फ 24 फीसदी हिस्सेदारी के बदले जेट का प्रभावी नियंत्रण विदेशी एयरलाइंस के पास जाने को लेकर है। एयर इंडिया की अनदेखी कर खाड़ी देश की एयरलाइन को फायदा पहुंचने पर भी विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है।
बाधाएं अभी बाकी हैं
जेट-ऐतिहाद सौदे को अभी बाजार नियामक सेबी, प्रतिस्पर्धा नियामक सीसीआई और सिविल एविएशन नियामक डीजीसीए की हरी झंडी मिलनी बाकी है। ये सभी अपने-अपने तरीके से इस डील की पड़ताल कर रहे हैं। हाल ही में डीजीसीआई ने प्रभावी नियंत्रण को लेकर उड्डयन मंत्रालय से जानकारियां मांगी हैं।
अब अबू धाबी हवाई समझौते की बारी
विदेशी निवेश बढ़ाने में जुटी सरकार जेट-ऐतिहाद सौदे के बाद अब अबू धाबी की हवाई सीटें बढ़ाने के समझौते को भी मंजूरी दे सकती है। इस समझौते से जेट-ऐतिहाद डील को फायदा पहुंचने की आरोप लग रहे हैं। अजित सिंह का कहना है कि अबू धाबी के साथ द्विपक्षीय हवाई समझौते पर स्थिति जल्द ही स्पष्ट हो जाएगी।
क्या हैं शर्तें
:- भारत सरकार की मंजूरी के बिना नहीं बदलेगा शेयर होल्डर्स एग्रीमेंट
:- शर्तों पर सहमत होने के बाद ही सीसीईए को जाएगा प्रस्ताव
:- विवादों का निपटारा अंग्रेजी के बजाय भारतीय कानूनों के तहत