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कर्ज डूबने की आशंका से वित्त मंत्रालय परेशान
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Fri, 17 May 2013 09:23 PM IST
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सार्वजनिक बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज की वसूली में आ रही दिक्कतों ने वित्त मंत्रालय की परेशानी बढ़ा दी है। देश के प्रमुख बैंकों के पास कर्ज लेने वाले ग्राहकों की तरफ से लगातार कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग के आवेदन आ रहे हैं।
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ऐसे में पहले से ही बढ़ती गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) से परेशान बैंकों की मुश्किलें और बढ़ गई है।
बीते वित्त वर्ष में पंजाब नेशनल बैंक ने कुल 14,147 करोड़ रुपये के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की है। इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2012-13 में 7,666.68 करोड़ रुपये की रिस्ट्रक्चरिंग की है।
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देश के प्रमुख बैंकों के बढ़ते रिस्ट्रक्चरिंग को देखते हुए अब वित्त मंत्रालय इनकी निगरानी करने की तैयारी कर रहा है, जिससे कि रिस्ट्रक्चर्ड हुए कर्ज एनपीए में न तब्दील हो जाएं।
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इस मामले में वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बढ़ता एनपीए एक चिंता का विषय है। इसे देखते हुए मंत्रालय ने बैंकिंग इंडस्ट्री के 50 बड़े एनपीए का ब्यौरा भी मांगा था।
साथ में बैंकों को यह भी निर्देश दिए थे कि वह कर्ज वसूली में सख्ती करें। अधिकारी के अनुसार बीते वित्त वर्ष में रिस्ट्रक्चरिंग की संख्या को देखते हुए इस बात का भी अंदेशा है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी रिस्ट्रक्चरिंग के आवेदन ज्यादा आएंगे।
ऐसे में इस तरह के आवेदन की निगरानी बेहद जरूरी है, जिससे कि रिस्ट्रक्चर्ड खाते कम से कम एनपीए तब्दील हो। मंत्रालय ने इसी संबंध में सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वह हर महीने बड़े रिस्ट्रक्चरिंग मामलों को अपने निदेशक मंडल में शामिल करें, जिससे कि वरिष्ठ अधिकारी खातों की समीक्षा कर सकें।
अधिकारी के अनुसार इसके अलावा वित्त मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक बैंकों के बोर्ड में सदस्य होता है, तो मंत्रालय के स्तर पर भी निगरानी हो सकेगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए पिछले तीन साल से काफी तेजी से बढ़ा है। साल 2010 में यह 59,924 करोड़ रुपये था, जो कि साल 2011 में 74,664 करोड़ रुपये और साल 2012 में बढ़कर 1,17,262 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।