फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   finance ministry focus on npa

बिना गारंटी कर्ज बांटना बैंकों को पड़ सकता है भारी

Thu, 31 Oct 2013 01:12 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 31 Oct 2013 01:12 PM IST
विज्ञापन
finance ministry focus on npa

सरकारी बैंकों की तरफ से बिना गारंटी के बांटे गए कर्ज उनके लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय ने इस तरह के कर्ज का ब्यौरा बैंकों से मांगा है।

विज्ञापन


वित्त मंत्रालय को इस बात का अंदेशा है कि बैंकों के कर्ज न चुकाने वाले ऐसे कई मामले हैं, जहां पर कर्ज देने में नियमों की अनदेखी की गई है। जिसकी वजह से सरकारी बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियां बढ़ती जा रही है। जून 2013 तक सरकारी बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियां 1.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। इसी तरह रिकवरी में भी गिरावट आई है।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों से अपने बड़े एनपीए खातों की जांच करने को कहा है। वित्त मंत्रालय को इस बात का अंदेशा है कि कई ऐसे मामले हैं, जहां पर कर्ज देने के नियमों की अनदेखी की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


खास तौर से इसके तहत सड़क परियोजनाओं, पॉवर सेक्टर, रियल्टी सेक्टर आदि के लिए दिए गए कर्ज पर वित्त मंत्रालय की नजर है। उसे इस बात का अंदेशा है कि यहां पर कई कर्ज बिना कोलैट्रल (बिना गारंटी) या बहुत कम कोलैट्रल के ही जारी किए गए हैं।

इस संबंध में एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने ब्यौरा मांगा है। पर जहां तक सड़क, पॉवर , रियल्टी सेक्टर आदि को बिना कौलैट्रल दिए कर्ज देने की बात है। तो यह कोई नई बात नही है। अभी इस तरह के कर्ज पर डिफॉल्ट बढ़ने की वजह परियोजनाओं का अटका होना है।

कई मामलों में पर्यावरण मंजूरी नहीं मिली है, तो कही भूमिं-अधिग्रहण का मामला है। इसी तरह कई सड़क परियोजनाओं में डेवलपरों ने हाथ खींच लिए हैं। ऐसे में इन कर्ज की वसूली में दिक्कत आ रही है।


अधिकारी के अनुसार किंगफिशर मामले में भी बैंकों के साथ वसूली में दिक्कत यह रही है कि उसके ज्यादातर हवाई जहाज लीज पर थे, ऐसे में बैंक उसकी नीलामी नहीं कर सकते है। केवल कंपनी की कुछ प्रॉपर्टी की ही नीलामी का जा सकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed