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'एक झटके में नहीं नकार सकते केजरीवाल के वादे'

Thu, 26 Dec 2013 01:04 PM IST
हरवीर सिंह/अमर उजाला, कारोबार डेस्क
हरवीर सिंह/अमर उजाला, कारोबार डेस्क Updated Thu, 26 Dec 2013 01:04 PM IST
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गिरती विकास दर और दस्तक देते आम चुनाव में उद्योग जगत को एक निश्चित आर्थिक एजेंडे की दरकार है, जिससे देश न केवल एक बार फिर तेज आर्थिक विकास की पटरी पर दौड़ सके, बल्कि दुनिया भर में इसकी पहचान मैन्यूफैक्चरिंग इकोनॉमी के रूप में भी हो सके।

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यह बातें उद्योग संगठन फिक्की के नव निर्वाचित अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला ने अमर उजाला के साथ बातचीत में रखी। पेश हैं सिद्धार्थ बिड़ला के साथ अमर उजाला के सीनियर एडिटर हरवीर सिंह और संवाददाता प्रशांत श्रीवास्तव के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
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प्रश्न- यह साल उद्योग जगत के लिए आर्थिक विकास के पहलू पर उम्मीदों भरा नहीं रहा है, मौजूदा परिस्थितियों में इस साल और अगले वित्त वर्ष के लिए उद्योग जगत का विकास दर को लेकर क्या अनुमान है?
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उत्तर- आर्थिक सुस्ती का असर चालू वित्त वर्ष में दिख रहा है, अभी तक इंडस्ट्रियल ग्रोथ दो फीसदी या उससे कम रही है, खनन क्षेत्र पर भी प्रतिकूल असर हुआ है। इसे देखते हुए चालू वित्त वर्ष में विकास दर पांच फीसदी या उससे कम रहने का अनुमान है।

जहां तक अगले साल की बात है तो सुधार की उम्मीद कृषि क्षेत्र में दिख रही है, जिसमें सर्विस सेक्टर थोड़ा सहयोग करेगा। इन परिस्थितियों में अगले साल भी 4.8 फीसदी से लेकर 5.5 फीसदी के बीच ही विकास दर का अनुमान है। हालांकि यह विकास दर हासिल करना भी कई सारे कारकों पर निर्भर करेगा।

मसलन कैबिनेट कमेटी ऑफ इनवेस्टमेंट (सीसीआई) ने जो प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं, वह ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो पाइपलाइन में हैं। अगर यह प्रोजेक्ट तय लक्ष्यों से पूरे होते हैं, तो इंडस्ट्रियल ग्रोथ 2.3-2.5 फीसदी होगी। अगर प्रोजेक्ट अमल में नहीं आते हैं, तो यह भी लक्ष्य पाना मुश्किल है।

प्रश्न- उद्योग जगत को इस समस्या से निकालने के लिए सरकार को कौन से कदम उठाने चाहिए, जिससे विकास दर फिर रफ्तार पकड़ सकती है?

उत्तर- एक तो यह कि इंडस्ट्री की मौजूदा समस्याओं को दूर किया जाय। दूसरा, प्रमुख लक्ष्य यह होना चाहिए कि भविष्य के लिए किस तरह से निवेश किया जाय। मौजूदा इंडस्ट्री के लिए जरूरी है कि उसमें प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाई जाए। प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी है कि इंफ्रास्ट्रक्चर लागत में कमी लाई जाए।

दूसरी अहम बात अपनी इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर बेहतर एक्सपोजर देना है। अभी हमारी वैश्विक स्तर पर पहुंच कारोबारियों की अपनी क्षमता के आधार पर है, न कि व्यवस्थागत सुविधाओं की वजह से।

उदाहरण के तौर पर जिस तरह से बांग्लादेश ने अपने टेक्सटाइल क्षेत्र में कदम उठाकर बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल कारोबारियों को दिया है, वैसे कदम हमें उठाने होंगे।

प्रश्न- नए निवेश में तेजी लाने के लिए हमें किस तरह के कदम उठाने होंगे, जिससे इंडस्ट्री और निवेशकों का भरोसा वापस लौट सके?

उत्तर- नए निवेश के लिए हमें निवेश के माहौल को अनुकूल बनाना होगा। पर्यावरण के क्षेत्र में मंजूरी से जुड़ी दिक्कतें हैं। अगर हम निवेश के लिए माहौल नहीं बनाएंगे, तो हमारे लिए आपूर्ति की समस्या बड़ी हो जाएगी। धीरे-धीरे हम केवल खपत करने वाली अर्थव्यवस्था ही रह जाएंगे। जबकि हमें मैन्यूफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था बनना होगा। इसके लिए हमें कुछ इंडस्ट्री की पहचान कर उसे आगे बढ़ाने के लिए काम करना होगा।

प्रश्न- अभी ऐसी कौन सी इंडस्ट्री हैं जिन्हें हम फोकस कर अपनी पहचान वैश्विक स्तर पर बना सकते हैं?

उत्तर- आज भारत के छोटे से छोटे शहरों में भी हमें विदेशी उत्पाद आसानी से मिल जाते हैं। यह प्रवृत्ति अच्छी नहीं है। इसे देखते हुए कई सारे उद्योगों पर फोकस करना होगा। इसमें सबसे अहम टेक्सटाइल उद्योग है।

इस क्षेत्र में काफी क्षमता है, जो कि बड़े पैमाने पर रोजगार देने के साथ वैश्विक स्तर हमारी पहचान बना सकता है। इसी तरह ऑटो सेक्टर और इंजीनियरिंग सेक्टर हैं जहां हमें फोकस बढ़ाने की जरूरत है। कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ हमें श्रम सुधारों की भी जरूरत है।

प्रश्न- आरबीआई द्वारा महंगाई को देखते हुए ब्याज दरें बढ़ाए जाने का असर इंडस्ट्री पर किस तरह पड़ रहा है, क्या हमें दूसरे विकल्पों को तलाशना होगा?

उत्तर- मौजूदा माहौल में इंफ्रास्ट्रक्चर लागत काफी बढ़ी है। हमें इसमें कमी लानी होगी। ब्याज में कमी को लेकर हमारी मजबूरियां है, ऐसे में हमें डेट (कर्ज) मार्केट जैसे विकल्प खोलने होंगे, जिससे इंडस्ट्री को लंबी अवधि के लिए पूंजी मिल सके।

प्रश्न- अब जबकि चुनावी माहौल बन रहा है, तो ऐसे में सरकार से क्या आपको सख्त फैसले और बेहतर नीतिगत फैसले की उम्मीद है?

उत्तर- अगर नए फैसले नहीं हो सकते हैं, तो भी हमें लगता है कि मौजूदा नीतियों में भी काफी कुछ किया जा सकता है और इसका बेहतर लाभ उठाया जा सकता है। फिक्की की एजीएम में भाजपा और कांग्रेस के नजरिए से यह बात स्पष्ट हुई है कि कि सरकार चाहे कांग्रेस की बने या भाजपा की, पर एक बात को लेकर आम राय बन रही है कि ग्रोथ बढ़ाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है। ऐसे में किसी के भी सरकार बनाने पर इकोनॉमिक एजेंडे में बदलाव नहीं होना चाहिए। मूल बात नीतियों के क्रियान्वयन की है, किसी भी सरकार को इस पर खास ध्यान देना होगा।

प्रश्न- खाद्य महंगाई से निबटना चुनौती है। हमारी उपज रखरखाव के अभाव में बर्बाद हो रही है। बैक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र को विकसित करने के लिए इंडस्ट्री क्यों नहीं आगे आ रही है?

उत्तर- यहां भी हम इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं जैसे बिजली, परिवहन आदि की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अगर सुविधाएं मिलें, तो कोल्ड चेन भी तैयार हो जाएंगी। डीजल के भरोसे पर कोल्ड चेन नहीं चलाया जा सकता है। हमें बिजली की जरूरत है। इसी तरह ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी विकसित करना होगा, तभी इस तरह के प्रोजेक्ट की प्रासंगिकता बनेगी।

प्रश्न- राजनीतिक पार्टियों को कारपोरेट द्वारा फंडिंग को लेकर भी कई सारे सवाल खड़े हो रहे हैं, ऐसे में क्या कॉरपोरेट के लिए पार्टियों को फंडिंग करना जरूरी है?


उत्तर- जहां तक इस मुद्दे की बात है, तो इस पर हम चर्चा कर रहे हैं। फिक्की ने एक इनक्लूसिव गवर्नेंस काउंसिल बनाई है। इसके तहत हम कारोबार में नैतिकता को लेकर ड्रॉफ्ट बना रहे हैं। हालांकि एक बात जरूर है कि पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

प्रश्न- ‘आप’ पार्टी की दिल्ली में सरकार बनने जा रही है, उनके चुनावी वादों और काम करने के तरीके पर आपकी क्या राय है?

उत्तर- वह चुनाव जीतकर आए हैं, उनके चुनावी वादों जैसे बिजली की दरों में कमी करना, पानी की उपलब्धता आदि पर उनकी अपनी एक खास राय है। मेरा मानना है कि उनके यह वादे काफी सोच-समझकर तैयार किए गए हैं, ऐसे में हम उन्हें एक झटके में नहीं नकार सकते। हमें आगे देखना होगा कि वह कैसे इन्हें अमल में लाते हैं।

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