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आयोग के डर से रियायती गैस की संख्या बढ़ाने पर चुप्पी
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jan 2013 07:54 PM IST
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सियासी दबाव में रियायती सब्सिडी प्राप्त रसोई गैस की संख्या सालाना छह से बढ़ाकर नौ करने की पूर्व योजना पर अब पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है। देश के तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद रियायती एलपीजी की संख्या बढ़ाना पेट्रोलियम मंत्रालय के लिए अब आसान नहीं रह गया है। आचार संहिता लागू होने की वजह से मोइली ने इस योजना पर चुप्पी साध रखी है।
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पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से फिलहाल चुनाव आयोग को रियायती रसोई गैस की संख्या बढ़ाने के लिए सूचना नहीं दी गई है। लेकिन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग से अनुमति लेकर इस योजना को जल्द अंजाम दिया जा सकता है।
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दूसरी ओर मोइली ने कहा है कि डीजल और रसोई गैस कीमतों की समीक्षा को लेकर सरकार गंभीर है। भले ही इस बारे में अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने केलकर समिति की सिफारिशों को कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति के समक्ष पेश कर दिया है। सरकार प्रस्तावित सिफारिशों पर निर्णय ले सकती है।
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केलकर समिति ने अपनी सिफारिशों में डीजल के दाम 4 रुपए और किरोसिन दो रुपए प्रति लीटर, एलपीजी 50 रुपए प्रति सिलेंडर तत्काल बढ़ाने का सुझाव दिया है। गौरतलब है कि बाजार मूल्य से कम कीमत पर ईंधन बिक्री के कारण चालू वित्त वर्ष में सरकार को 1लाख 60 हजार करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान की उम्मीद है।