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दस लाख से कम आबादी वाले शहर में भी मल्टी ब्रांड रिटेल
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 02 Aug 2013 01:28 AM IST
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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने इसके नियमों में ढील दे दी है।
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बृहस्पतिवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई की शर्तें आसान बनाने के साथ-साथ टेलीकॉम समेत कई क्षेत्रों में एफडीआई सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
लेकिन रक्षा क्षेत्र में 26 एफडीआई की सीमा कायम रखी गई है। पहले रक्षा से जुड़े उच्च तकनीकी क्षेत्रों 26 फीसदी से ज्यादा एफडीआई की छूट देने पर सहमति बनी थी।
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई नियमों को स्पष्ट कर दिया गया है।
30 फीसदी खरीद छोटे व मझोले (एसएमई) उद्योगों करने के मामले में अब प्लांट व मशीनरी पर 20 लाख डॉलर तक निवेश करने वाली इकाइयों को एसएमई माना जाएगा।
पहले यह सीमा 10 लाख डॉलर थी। लेकिन 30 फीसदी स्थानीय खरीद की पाबंदी खरीद की शुरुआत के लिए होगी। अब इस दौरान कोई एसएमई विस्तार करती है तब भी खरीद जारी रहेगी।
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एग्रो कॉपरेटिव को भी एसएमई खरीद के दायरे में रखा गया है। अब जिन शहरों की आबादी 10 लाख से कम है, वहां भी एफडीआई के जरिए मल्टीब्रांड रिटेल स्टोर खुल सकेंगे।
शर्मा ने बताया कि राज्य अपनी मर्जी से शहरों का चयन कर सकते हैं। पहले सिर्फ दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में ही ऐसे स्टोर खोलने की पाबंदी थी।
मल्टीब्रांड में एफडीआई का 50 फीसदी निवेश बुनियादी ढांचे में करने के नियमों को भी सरल बनाया गया है। इस 50 फीसदी निवेश की पाबंदी सिर्फ शुरुआती 10 करोड़ डॉलर के निवेश पर लागू रहेगी।
एफडीआई की छूट मिलने के बावजूद अभी तक वालमार्ट, टेस्को जैसे दिग्गज रिटेलर निवेश के लिए आगे नहीं आए हैं। जिसे देखते हुए नियमों में ढील देने का फैसला किया गया है।