किसानों को और मिलेगा कड़वी दवा का डोज
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महंगाई रोकने के लिए मोदी सरकार राज्य सरकारों से भी कड़वी डोज दिलाने की कोशिश में जुट गई है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर राज्यों द्वारा बोनस घोषित करने पर मोदी सरकार रोक लगवाना चाहती है।
इसके लिए खाद्य मंत्रालय ने राज्यों के खाद्य सचिवों को पत्र लिखकर धान व गेहूं पर बोनस नहीं देने के लिए आगाह किया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को बोनस घोषित कर बाजार बिगाड़ने का दोषी ठहराते हुए ऐसे राज्यों में अनाज की सरकारी खरीद रोकने की चेतावनी दी है।
पहले दिया जाता था बोनस
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों ने हाल के वर्षों में किसानों को गेहूं पर एमएसपी के अलावा बोनस भी दिया है। हालांकि, राज्य सरकारों के इस कदम से इन प्रदेशों में किसानों को प्रोत्साहन मिला और अनाज की पैदावार बढ़ी है।
लेकिन केंद्र सरकार का मानना है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्य बोनस देकर अपनी जरूरत से बहुत ज्यादा अनाज खरीद लेते हैं। इससे केंद्र पर फूड सब्सिडी और भंडारण का बोझ बढ़ता है साथ ही बाजार का संतुलन बिगड़ता है।
सरकार करेगी दूसरे उपाय
खाद्य मंत्रालय की ओर से राज्यों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, जो राज्य गेहूं और धान पर एमएसपी से ऊपर बोनस देंगे, वहां केंद्र सरकार सरकारी खरीद से हाथ खींच सकती है। ऐसे राज्यों को अनाज की खरीद और भंडारण की व्यवस्था खुद करनी पड़ेगी।
राज्यों द्वारा बोनस के ऐलान पर लगाम कसने के लिए खाद्य मंत्रालय एफसीआई के साथ मिलकर ऐसे राज्यों पर नजर बनाए हुए है। इन राज्यों की अनाज खपत के हिसाब से केंद्रीय पूल का कोटा तय कर अतिरिक्त अनाज का जिम्मा राज्यों पर डालने की तैयारी है।
बोनस को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद
राज्यों द्वारा फसलों पर दिए जाने वाले बोनस को लेकर विशेषज्ञों में काफी मतभेद हैं। खाद्य नीति के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार अगर किसानों को प्रोत्साहन देती है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस प्रकार किसानों को प्रोत्साहन मिलने से अनाज उत्पादन बढ़ा है। राज्यों को बोनस देने से रोकना रोकना सरासर अनुचित है।
उधर, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी का मानना है कि सरकार को फसलों के भाव बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर ही तय करने चाहिए।