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किसान कर सकेंगे कम पानी में रोगमुक्त चने की खेती

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 28 Jan 2013 11:42 PM IST
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farmers will cultivating gram in less water
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कभी पानी की कमी तो कभी कीड़ों के कहर के चलते अपेक्षित पैदावार से महरूम रहने वाले किसानों को अब इन मुश्किलों का शायद सामना नहीं करना पड़ेगा। कृषि वैज्ञानिकों ने चने की जिनोम को डिकोड करते हुए उसके जीन प्रणाली का रहस्य खोज निकाला है। इस काम में भारत सहित दस देशों के लगभग 49 वैज्ञानिकों का दल लगा हुआ था। चने के जीन का रहस्य उजागर हो जाने से भविष्य में इसकी उपज बढ़ाना आसान हो जाएगा।
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कृषि मंत्रालय के मुताबिक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के नेतृत्व में दुनिया भर के 23 संगठनों के 49 वैज्ञानिकों के दल ने चने की 90 प्रजातियों की जीन प्रणाली के रहस्य को खोज निकाला है। इसके कारण चने की पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी और ऐसा चना विकसित किया जा सकेगा, जो रोगों और सूखे से लड़ने में सक्षम होगा।
आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ एस के दत्ता ने बताया कि इस अनुसंधान दल में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) दिल्ली, इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सेमीएरिड ट्रॉपिक्स (एक्रीसेट) हैदराबाद और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पल्सेज रिसर्च कानपुर के वैज्ञानिक भी शामिल थे।
 
एक्रीसेट के वरिष्ठ वैज्ञानिक राजीव वार्ष्णेय के मुताबिक विश्व में सबसे ज्यादा पैदा होने वाली फसलों में चना दूसरे स्थान पर है। मौजूदा समय में लगभग 115 लाख हेक्टेयर भूमि पर इसकी खेती की जा रही है। इसकी फसल ज्यादातर गरीब किसान करते हैं और इसे सूखे इलाकों में बोया जाता है। भारत चने का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके अलावा इथियोपिया, तंजानिया, केन्या, आस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका में भी इसकी खेती की जा रही है।
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