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किसान जल्द चाहते हैं गन्ने का नया एसएपी

Wed, 21 Nov 2012 08:45 PM IST
कृष्णेंदु कुमार/रामपुर
कृष्णेंदु कुमार/रामपुर Updated Wed, 21 Nov 2012 08:45 PM IST
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farmers seek higher state advised price for sugarcane

खेतों में गन्ने की फसल खड़ी है, किसानों को गेहूं की बुआई करनी है। चीनी मिलें चल नहीं रही हैं। ऐसे में किसान अपना गन्ना औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं।

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राज्य सरकार वर्तमान पेराई सत्र के लिए स्टेट एडवाइजरी प्राइस (एसएपी) घोषित करने में भी विलंब कर रही है। ऐसे में विपक्ष ने सरकार पर शुगर मिल लॉबी के दबाव में काम करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। सरकार ने जल्द ही एसएपी पर कोई फैसला नहीं लिया तो प्रदेश में गन्ने की राजनीति गरमा सकती है।
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पिछले साल बसपा सरकार ने 2011-12 की पेराई सत्र के लिए गन्ने का एसएपी 8 नवंबर को जारी कर दिया था और इसे 205 से बढ़ाकर 240 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था। विधानसभा चुनाव भी होने थे लिहाजा सरकार ने चीनी मिलों को भी जल्द शुरू करा दिया था। पिछले साल 21 नवंबर को स्थिति यह थी कि प्रदेश की लगभग 43 मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी थी। इस साल पूरे प्रदेश में अभी तक आठ से दस मिलों में पेराई शुरू हुई है।
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इस साल पूरे प्रदेश भर में गन्ने की बुआई लगभग 23.60 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले पेराई सत्र के मुकाबले चार फीसदी अधिक है। गन्ना उत्पादक किसान चालू पेराई सत्र के लिए 300 रुपये प्रति क्विंटल एसएपी की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जो पिछले साल 240 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर था। पिछले साल जब प्रदेश सरकार ने 240 रुपये प्रति क्विंटल के एसएपी का ऐलान किया था तो सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इसे नाकाफी बताते हुए रेट कम से कम 300 रुपये होने की बात कही थी।

इस बार अब प्रदेश में सपा की सरकार है। सरकार गन्ने का एसएपी घोषित करने में टालमटोल कर रही है। 20 नवंबर को हुई कैबिनेट की मीटिंग में मुख्यमंत्री को गन्ना मूल्य घोषित करने के लिए अधिकृत कर दिया है। 23 नवंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी शुरू होने जा रहा है, अगर मुख्यमंत्री ने जल्द ही गन्ने का एसएपी घोषित नहीं किया और इसमें उचित वृद्धि नहीं की तो विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करेगा।

राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन के संयोजक वीएम सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार शुगर मिल लॉबी के दबाव में गन्ने का एसएपी घोषित नहीं कर रही है। एक अक्टूबर से गन्ने का सीजन शुरू हो जाता है। पूरा सीजन खत्म हो जाने के बाद सरकार रेट घोषित करके क्या करेगी?

भाजपा विधायक राजेश अग्रवाल का कहना है कि बहुत की गंभीर समस्या है। पूरे प्रदेश का गन्ना उत्पादक किसान परेशान है। गन्ने का मूल्य अभी तक घोषित नहीं किया गया है। भाजपा इस मुद्दे को पूरे गंभीरता के साथ विधानसभा में उठाएगी। उधर, बसपा विधायक यूसुफ अली का कहना है कि प्रदेश में जब बसपा की सरकार थी तो हर बार समय पर एसएपी की घोषणा की गई।


इसमें उचित वृद्धि भी की गई। सपा सरकार इस मुद्दे पर टालमटोल की नीति अपनाए हुए है। इससे पता चलता है कि सपा सरकार किसान विरोधी है। बसपा इस मुद्दे को पूरे शिद्दत के साथ विधानसभा के शुक्रवार से होने वाले सत्र में उठाएगी।                             

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