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गुलाब के गिरे दाम, किसान हुए ‘धड़ाम’
हसायन/ब्यूरो
Updated Sun, 31 Mar 2013 12:37 AM IST
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गुलाब की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट ने हसायन के किसानों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। एक हफ्ते के भीतर ही गुलाब के रेट 1600 रुपये प्रति मन तक धराशाई हो गए हैं।
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शुरू में 3,100 रुपये प्रति मन के हिसाब से बिके गुलाब के रेट अब 1,500 रुपये प्रति मन (40 किग्रा) ही रह गए हैं यानि आधी से भी ज्यादा गिरावट। किसान सदमे में हैं।
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किसानों को मुनाफा निकलना तो दूर, लागत निकालने के भी लाले पड़ रहे हैं। किसान लागत से भी कम रेटों पर फूल बेचने को मजबूर हैं। किसानों ने तय कर लिया है कि कीमतों में गिरावट नहीं थमी तो वह अपनी फसल बेचने की बजाय उजाड़ देंगे। इसके लिए व्यापारियों के साथ प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार होगा।
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हसायन में इस बार गुलाब की कीमतों की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई थी। पिछले साल 4,500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति मन की दर पर बिके गुलाब के रेट की शुरुआत ही इस बार करीब डेढ़ हजार रुपये तक कम से हुई, जिससे किसान पहले से ही टेंशन में थे, लेकिन पिछले एक हफ्ते में इस बड़ी गिरावट ने किसानों के प्राण सुखा दिए हैं। गुलाब पैदा करने वाले किसान बर्बादी के कगार पर हैं और खून के आंसू रोने को मजबूर हैं।
अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी किसानों को
दिन रात एक करके अपनी गुलाब की फसल उगाने वाले किसानों को इस सीजन में अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआत में ही कीमतों ने इतना तगड़ा झटका दिया कि किसानों के सारे अरमान मिट्टी में मिल गए। कीमतों में गिरावट के चलते किसानों की होली भी इस बार फीकी रह गई। किसानों का कहना है कि व्यापारियों और दलालों ने मिलकर कीमतें गिराने का यह खेल शुरू किया है। इतनी बड़ी गिरावट की उम्मीद किसानों को भी नहीं थी और न ही पिछले सालों में कभी ऐसा हुआ है कि एक साथ गुलाब के रेट आधे से भी कम रह गए हों।
आठ साल पहले प्रशासनिक हस्तक्षेप से मिली राहत
संकट की इस घड़ी में किसानों को प्रशासनिक से भी कोई मदद नहीं मिल रही। करीब आठ साल पहले भी हसायन के किसान ऐसी स्थिति से गुजरे थे। उस समय भी उन्हें प्रशासनिक हस्तक्षेप से ही राहत मिली थी। तत्कालीन एडीएम ने खुद बैठकर गुलाब का तर्कसंगत रेट तय कराया था, लेकिन इस बार तो किसानों की बदहाली पर प्रशासन ने पूरी तरह आंखें मूंद रखी हैं।
किसान और कारोबारियों में टकराव की आशंका
अगर कीमतों को लेकर किसान और कारोबारियों के बीच टकराव की नौबत आई तो कस्बे में औद्योगिक अशांति के हालात पैदा हो जाएंगे। जानकारों की मानें तो कस्बे में टकराव की संभावना बनती भी जा रही है। बर्बादी के कगार पर खड़े किसानों का गुस्सा कभी फूट सकता है। ऐसी स्थिति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार होगा।
कोल्ड स्टोर हो तो नहीं होगी फूल की बेकद्री
अपनी खुशबू के लिए मशहूर हसायन के गुलाब की बेकद्री की सबसे बड़ी वजह इसकी सुरक्षा का इंतजाम न होना है। बड़े पैमाने पर गुलाब की पैदावार होने के बावजूद कस्बे में आज तक एक भी ऐसा चिलिंग प्लांट नहीं बनाया गया, जिसमें फूल को दो-तीन दिन तक सुरक्षित रखा जा सके। टूटने के बाद इस फूल को 24 घंटे भी सुरक्षित रखना मुश्किल होता है। ऐसे में किसानों के सामने इसे औने-पौने दामों पर बेचने के सिवाय और कोई चारा भी नहीं बचता। उनकी इसी मजबूरी का आढ़तिए और कारोबारी आज तक फायदा उठाते आ रहे हैं।