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आरबीआई के रुख से निर्यातक मायूस
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Dec 2012 11:05 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से ब्याज दरों में कमी न करने के फैसले से निर्यातकों की सस्ते कर्ज पाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फियो) का कहना है कि आरबीआई के इस रुख से छोटे और मझोले उद्योगों (एसएमई) के निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है।
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अमर उजाला के साथ बातचीत में फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा है कि आरबीआई ने मौद्रिक नीति की समीक्षा में निर्यातकों की दिक्कतों को हल नहीं किया है। भारत का ज्यादातर निर्यात छोटे और मझोले उद्योगों से होता है। ब्याज दरों में कमी न होने से इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
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सहाय का कहना है कि एसएमई निर्यात के लिए दिए जाने वाले बैंक कर्ज में पिछले दो साल के दौरान कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। फिलहाल निर्यातकों को 11.50 फीसदी या इससे भी ज्यादा महंगी दरों पर कर्ज मिलता है। वैश्विक मंदी का असर एशियाई देशों तक पहुंचने की वजह से इस साल अप्रैल से नवंबर तक भारत का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 5.95 फीसदी गिर चुका है और व्यापार घाटा 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार की ओर से प्रस्तावित राहत पैकेज के बारे में अजय सहाय का कहना है कि सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग से निर्यात के लिए कर्ज पर दो फीसदी ब्याज छूट योजना का लाभ भारी उद्योगों, रत्न एवं आभूषण व चमड़ा उद्योग को भी दिए जाने की मांग की जा रही है। लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए लगता है कि सरकार ज्यादा से ज्यादा इंजीनियरिंग क्षेत्र को ही इसके दायरे में ला पाएगी। उल्लेखनीय है कि इस सप्ताह सरकार निर्यात के लिए राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है।
सोने के आयात पर प्रतिबंध बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में सहाय का कहना है कि इस साल के पहली छमाही में सोने का आयात करीब 24 फीसदी कम हुआ है, इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो सोने की तस्करी बढ़ेगी। व्यापार घाटे का कम करने के लिए सरकार को आयात घटाने की बजाय निर्यात बढ़ाने की रणनीति पर अमल करना चाहिए।