बजट से 10 उम्मीदें, बढ़ सकती है कर छूट भी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कर छूट
हाल ही में एसोचैम की तरफ से किए गए एक सर्वे के मुताबिक यह बात सामने आई है कि लोग इस बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने की उम्मीद कर रहे हैं।
एसोचैम की तरफ से यह सर्वे 92 प्रतिशत लोगों के बीच कराया गया है, जिसमें महिला और पुरुष दोनों ही शामिल थे। सभी यही चाहते हैं कि इनकम टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए की जानी चाहिए।
इस सर्वे में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद, हैदराबाद, पुणे, चंडीगढ़ और देहरादून के करीब 500 नौकरीपेशा लोगों को शामिल किया गया था।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन भी आयकर में छूट का दायरा बढ़ाने और निवेश पर मिलने वाली कर छूट को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाने के समर्थन में हैं। महंगाई की तगड़ी मार जेब पर पड़ने के बाद लोग बजट से राहत की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनके हाथ में कुछ और पैसे आ सकें।
लग सकता है एक्सपेंडिचर टैक्स
इस समय लागू आयकर के प्रावधानों के मुताबिक ढाई लाख की आमदनी पर कोई कर नहीं लगता, जबकि आय कर कानून की धारा 80 सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक का निवेश करके कर में बचत की जा सकती है। मतलब चार लाख रुपये पर कोई कर नहीं लगता।
मंत्रालय के समक्ष एक प्रस्ताव आया है कि स्टेंडर्ड डिडक्शन और 80 सी के तहत निवेश को मिलाकर कर में छूट की सीमा पांच लाख रुपये कर दी जाए। इस वजह से सरकार को जो घाटा होगा, उसे एक्सपेंडिचर टैक्स लगा कर पूरा कर लिया जाए।
प्रस्ताव के मुताबिक 10,000 रुपये से अधिक के खर्च पर 0.01 फीसदी का एक्सपेंडिचर टैक्स लगा दिया जाए। इस तरह का टैक्स कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था में चलन में हैं।
अधिकारी ने बताया कि आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने और एक्सपेंडिचर टैक्स लगाने से दोहरा लाभ होगा।
पहला कि पांच लाख रुपये तक की आमदनी पर कर नहीं लगने से लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे होंगे। यदि खर्च ज्यादा होगा तो उद्योग-व्यापार जगत को लाभ होगा और सरकार के पास अप्रत्यक्ष कर से पैसे आएंगे। दूसरा, इससे बचत को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
स्मार्ट सिटी पर रह सकता है जोर
इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जोर के बीच उम्मीद है कि इस बजट में स्मार्ट सिटी परियोजना पर खासा जोर देखने को मिलेगा।
बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली करीब 50,000 करोड़ रुपये की लागत से देश के बंदरगाहों (पोर्ट) वाले प्रमुख शहरों में 12 स्मार्ट सिटी की स्थापना की घोषणा कर सकते हैं।
योजना के मुताबिक हर पोर्ट के पास एक स्मार्ट सिटी विकसित की जाएगी। इसकी लागत 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये होगी। यह शहर न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे, बल्कि इनमें बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर जोर दिया जाएगा।
बीमा प्रीमियम पर बढ़े कर छूट
देश की संपूर्ण बचत में घरेलू बचत का बहुत बड़ा योगदान है। आधारभूत संरचना विकास के लिए छोटी-छोटी बचत का उपयोग करने की आवश्यकता है। जीवन बीमा द्वारा अपनी व्यापक खुदरा पहुंच से इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।
यह छोटी बचतों के समूह के तौर पर काम कर सकता है। इसके लिए जीवन बीमा के प्रीमियम भुगतान के लिए डेढ़ लाख रुपये की छूट हेतु धारा 80 सीसीई में अलग सीमा पर विचार किया जाना चाहिए।
हमें उम्मीद है कि स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम के लिए धारा 80 डी के तहत भी छूट सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया जाना चाहिए।
60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी में बढ़ोतरी तथा राज्य समर्थित कल्याणकारी योजनाओं के मद्देनजर भारत में निजी पेंशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
सरकार ने एनपीएस के लिए धारा 80 सीसीडी (2) के अंतर्गत विशिष्ट टैक्स ब्रेक्स को विस्तारित करके सही शुरुआत की है। ऐसे में आइआरडीएआई द्वारा स्वीकृत पेंशन प्लान के लिए भी समान लाभ लागू करना उचित हो सकता है।
जीएसटी का दिखेगा रोडमैप
अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में अब तक के सबसे महत्वपूर्ण सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को 1 अप्रैल 2016 से देश भर में लागू करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री बजट में रोडमैप का प्रावधान कर सकते हैं। ऐसा इसलिए, ताकि देसी-विदेशी निवेशकों को संकेत मिले कि सरकार आर्थिक सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है।
वरिष्ठ आधिकारी स्तर के एक सूत्र के मुताबिक जीएसटी के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क में भी नकारात्मक सूची (निगेटिव लिस्ट) इस बजट में जारी हो सकती है। यह उसी तरह से होगी, जैसे कि सेवा कर में नकारात्मक सूची है। जीएसटी के लागू होने से भारत में उद्योग एवं कारोबारी जगत को काफी आसानी होगी, इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है।
उद्योग जगत बार-बार इसके लागू होने की तिथि पर संदेह जताता रहा है। इससे पहले भी कई बार जीएसटी के बारे में तिथि की घोषणा हो चुकी है, लेकिन यह लागू नहीं हो पाया। इस बार वित्त मंत्री ने सभी राज्यों की सहमति बनाने के लिए कई उपाय किए हैं और तब जाकर 1 अप्रैल 2016 से इसे देश भर में लागू करने पर सहमति बनी है।
पेश हो नए आर्थिक सुधारों का ब्लू प्रिंट
उम्मीद है कि बजट में सरकार नए आर्थिक सुधारों का ब्लू प्रिंट पेश करेगी, जिससे कि देश की अर्थव्यवस्था सतत विकास के युग में प्रवेश कर सके।
बजट में ऐसे उपाय किए जाने चाहिए, जो अर्थव्यवस्था में रिकवरी को बढ़ावा देकर 8 फीसदी की आर्थिक विकास दर तक ले जाए। नई परियोजनाओं की शुरुआत तभी हो सकती है, जबकि मांग में फिर से तेजी लाने के कारगर उपाय बजट में किए जाएं।
ऐसे में सरकार की ओर से बजट में पूंजीगत खर्च में किसी तरह की कटौती किए जाने का प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विनिवेश की दिशा में भी और अधिक केंद्रित रूप से कदम बढ़ाए जाने की जरूरत है।
रीयल्टी ढांचे में हो बदलाव
सरकार की हाल ही में घोषित की गई नीतियां और 2022 तक सभी को घर देने की घोषणा यह दर्शाती है की सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर गंभीर है और इसी से हम डेवलपर्स को ये उम्मीद बंधी है कि वो जमीनों को सस्ते दरों में उपलब्ध करवाए, जिससे डेवलपर्स को अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को लाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
सरकार इस बजट में डेवलपर्स को बैंकों और दूसरी आर्थिक संस्थाओं से मिलने वाले कर को कम से कम 10 फीसदी से कम दरों पर दिलवाए, ताकि डेवलपर्स भी 2022 के इस लक्ष्य को पूरा करने में सरकार की मदद कर सकें।
इस उद्योग को बदहाली से बाहर लाने के लिए सरकार और प्राइवेट डेवलपर्स को एक साथ गठजोड़ नीतियों से काम करना पड़ेगा, ताकि ग्राहकों में इसके प्रति विश्वास को पुन: कायम किया जा सके।
इस बजट में हम यही आशा करते हैं की सरकार इन सभी बातों पर गौर करे, जिससे भारत को कई नए शहर देने में डेवलपर्स का सहयोग मिल सके। डेवलपर्स और सरकार मिल कर एक विकसित भारत का निर्माण कर सकें।
खाद्य उद्योग की मशीनों से हटे आयात शुल्क
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को विश्वस्तरीय बनाने के लिए मशीनों का आयात आवश्यक है। इसलिए मशीनों के आयात पर शुल्क शून्य किया जाना चाहिए। आयात के सिर्फ आधार शुल्क को ही नहीं इससे जुड़े अन्य अतिरिक्त शुल्क को भी समाप्त किया जाना चाहिए।
आयात शुल्क व इस पर लगने वाले अन्य शुल्क को जोड़ दिया जाए तो यह 30-35 फीसदी बैठता है और इतने अधिक शुल्क पर छोटे उद्यमी मशीनों का आयात नहीं कर सकते हैं। यह उनकी सीमा से बाहर हो जाता है।
सरकार को छोटे व मझोले उद्योग की वित्तीय सीमा में भी बदलाव करना चाहिए। छोटे उद्योग की निवेश सीमा को बढ़ाकर 15-20 करोड़ रुपये करना चाहिए वहीं मध्यम उद्योग की सीमा को 50 करोड़ रुपये तक किया जाना चाहिए। सरकार को बजट में टीडीएस को सरल बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
अक्षय ऊर्जा का रोडमैप दे सकते हैं जेटली
वित्त्त वर्ष 2015-16 के लिए पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोडमैप जारी कर सकते हैं।
इस रोडमैप में निवेशकों को निवेश की गारंटी देने का मैकेनिज्म, नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े कर्ज के लिए अलग से कोष की व्यवस्था, निवेश पर इंसेंटिव को शामिल किया जा सकता है।
बजट में कोयले पर लगने वाले सेस में बढ़ोतरी की जा सकती है, ताकि इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में किया जा सके।
बजट में नवीकरणीय ऊर्जा के पूरे रोडमैप को रख दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दो चीजें सरकार कर सकती है।
निवेशकों को निवेश की गारंटी देने के मैकेनिज्म और उन्हें एक निश्चित रकम केनिवेश के बाद इंसेंटिव। कोयले पर सेस में बढ़ोतरी की जा सकती है। इस साल कोयला सेस से 15,000 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।
टेलीकॉम सेक्टर को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा
इस बार के बजट में वित्तमंत्री से एक सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षा यह है कि स्पेक्ट्रम शेयरिंग और ट्रेडिंग के माध्यम से सही रूप में अधिक एयरवेज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे टेलीकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम की क्षमता का पूरी तरह से इस्तेमाल करने में मदद मिले।
स्पेक्ट्रम के आवंटन को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए और इसकी नीलामी के लिए फोकस्ड संसाधनों का प्रयोग होना चाहिए। आज नीलामी के एक स्ट्रीमलाइन सिस्टम की कमी के कारण स्पेक्ट्रम आवंटन के अपेक्षित फायदे नहीं मिल पाते हैं, जिसके कारण इस उद्योग में अनिश्चितता पैदा होती है।
अत: स्पेक्ट्रम के बिजनेस में पूरी जानकारी प्राप्त करने की दिशा में केंद्रित अभियानों का इस उद्योग की कार्यप्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और यह अधिक संगठित हो सकता है।