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कानून बदले तो आरबीआई देगा सीआरआर पर ब्याज
मुंबई/एजेंसी
Updated Mon, 10 Dec 2012 10:00 PM IST
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यदि कानूनी प्रावधानों में संशोधन कर दिया जाए, तो रिजर्व बैंक बैंकों को उनके कैश रिजर्व (सीआरआर) पर ब्याज देने को तैयार है। आरबीआई की ओर से यह मंशा डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने जताई है। चक्रवर्ती ने कहा कि मौजूदा कानून रिजर्व बैंकों को सीआरआर पर ब्याज देने की इजाजत नहीं देते। ऐसा कुछ साल पहले हुए कानूनी संशोधन के चलते है।
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सीआरआर पर ब्याज के लिए सरकार को इसके लिए नियमों में बदलाव करना होगा। इसके अलावा अगर बैंकों को सीआरआर को एक बोझ की तरह उठाना पड़ रहा है, तो इसकी भरपाई वह दूसरे तरीकों से कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सीआरआर का भार बैंकों पर इसलिए रखा गया है क्योंकि क्योंकि धन जुटाने का काम वही कर सकते हैं।
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चक्रवर्ती ने बताया कि आरबीआई को होने वाली आय का ज्यादातर हिस्सा सीआरआर से ही आता है। उन्होंने कहा कि पहले आरबीआई बैंकों को सीआरआर पर ब्याज का भुगतान करता था, पर कुछ वर्ष बहले सरकार द्वारा कानून में बदलाव किए जाने के बाद से इसे बंद कर दिया गया है। मौजूदा समय में आरबीआई द्वारा सीआरआर में एक फीसदी की कटौती किए जाने पर देश के बैंकिंग तंत्र में करीब 70 हजार करोड़ रुपये की नकदी आती है।
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चक्रवर्ती ने बताया कि सीआरआर का प्रावधान इस समय दुनिया के कुछ ही देशों में प्रचलित है। उनमें से ज्यादातर में बैंकों को इसपर ब्याज मिलता है। मिसाल के तौर पर अमेरिका में लीमैन ब्रदर्स बैंक के वित्तीय संकट में फंसने के बाद से वहां का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंकों को सीआरआर पर 0.25 फीसदी ब्याज का भुगतान करता है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने सीआरआर को बैंकों के पैसे की बर्बादी कहते हुए इसे एक बोझ बताकर आरबीआई से सीआरआर पर ब्याज की मांग की थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि सीआरआर के रूप में रिजर्व बैंक के पास नकदी जमा करने का प्रावधान केवल बैंकों पर ही लागू है, जबकि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और बीमा कंपनियों के ऊपर ऐसी कोई बाध्यता नहीं रखी गई है।