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समय पर पीएफ के भुगतान में पिछड़ रहा ईपीएफओ

Mon, 04 Mar 2013 11:36 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 04 Mar 2013 11:36 PM IST
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epfo is lagging in making payments of pf on time

भविष्य निधि (पीएफ) खाते में जमा रकम को निकालने के लिए भले ही आवेदनकर्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) समय से उन्हें रकम मुहैया कराने में सफल नहीं हो पा रहा है।

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अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1 अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच तमाम क्षेत्रीय कार्यालयों में 5 लाख 85 हजार से अधिक दावे लंबित पाए गए हैं। लंबित मामलों की बढ़ती फेहरिस्त को देखते हुए केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इन मामलों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
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उन्हें यह भी हिदायत दी गई है कि अधिकतम मामलों का निपटारा अगले 30 दिन के अंदर पूरा किया जाए। श्रम मंत्रालय के मुताबिक महाराष्ट्र में सर्वाधिक 1,36,399 मामले लंबित हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में 18,115, दिल्ली में 39,327, हरियाणा 29,442, हिमाचल प्रदेश में 2,642, पंजाब में 10,155 और उत्तराखंड में 6,590 मामलों का निपटारा अब तक नहीं हो सका है।
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ईपीएफओ का कहना है कि दावा निपटारे की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले आसान बना दिया गया है लेकिन जानकारी के अभाव में खाताधारक सही प्रक्रिया से आवेदन नहीं कर पाते हैं। जबकि कई आवेदन संदेहास्पद भी हैं। कंप्यूटर ऐसे आवेदनों को खारिज कर रहा है। इसलिए संगठन को दावा निपटाने में तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

भविष्य निधि खाते में जमा रकम के लिए दावा करने वाले 30 लाख से ज्यादा आवेदनों को ईपीएफओ ने पिछले एक साल में खारिज कर दिया है। ईपीएफओ के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ईपीएफओ के पास कई ऐसे पुराने खाते हैं, जिसमें नामिनी का जिक्र नहीं है। लेकिन इन खातों से रकम निकालने के  लिए आवेदन किया जा रहा है। कई पीएफ खातों पर सालों बाद दावेदारी की जा रही है। लेकिन दावा के लिए आवेदनकर्ता खुद को प्रमाणित नहीं कर सका है। इन कारणों से भी ईपीएफओ को दावा निपटाने में दिक्कत आ रही है।

निजी पीएफ ट्रस्ट पर रहेगी कड़ी निगरानी
निजी भविष्य निधि ट्रस्ट पर निगरानी बढ़ाने के लिए ईपीएफओ ने सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम इस्तेमाल का निर्णय लिया है, ताकि उन प्रतिष्ठानों में भी ईपीएफ की योजनाओं का अनुपालन हो रहा है या नहीं, इसपर नजर रखी जा सके। इस बाबत ईपीएफओ के कर्मचारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे निजी कंपनियों की ओर से प्रबंधित किए जाने वाले ईपीएफ खातों और फंड पर आईटी के बेहतर इस्तेमाल से निगरानी बढ़ाएं।

दरअसल कई निजी कंपनियां खुद निजी भविष्य निधि ट्रस्ट की देखभाल करती हैं। इस ट्रस्ट में जमाकर्ताओं को भी ईपीएफओ जमाकर्ताओं की तरह आयकर में छूट का लाभ मिलता है। ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालयों को यह कहा गया है कि छूट प्राप्त ट्रस्ट या प्रतिष्ठानों या निजी पीएफ ट्रस्ट ने प्रत्येक वर्ष का रिटर्न प्रस्तुत किया गया है या नहीं।

और नियोक्ता व कर्मचारियों की ओर से इसमें समय से रकम जमा की जा रही है या नहीं, इस पर कड़ी निगरानी रखी जाए। यह भी देखा जाए कि ये संस्थाएं तय समय सीमा के अंदर पीएफ निवेश पैटर्न के तहत जमा राशि का निवेश कर रहे हो।


उल्लेखनीय है कि निजी पीएफ ट्रस्ट के लिए ईपीएफओ की ओर से तय ब्याज दर के बराबर ब्याज देना अनिवार्य होता है। हालांकि ट्रस्ट चाहे, तो इससे ज्यादा रकम भी अपने जमाकर्ताओं को दे सकता है। गौरतलब है कि ईपीएफओ की ओर से वर्ष 2011-12 में छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों या निजी पीएफ ट्रस्ट की संख्या 2,750 आंकी गई थी, जबकि अन्य रिकॉर्ड के मुताबिक इनकी संख्या 4,417 आंकी गई है।

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