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घटेंगे रोजगार के नए अवसर
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 27 Feb 2013 11:05 PM IST
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भारतीय अर्थव्यवस्था से मंदी के बादल छंटने का दावा भले ही वित्त मंत्रालय का आर्थिक समीक्षा कर रहा हो लेकिन इसी सर्वे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में रोजगार बढ़ने के बजाए घटेंगे।
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आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों के मुताबिक 2020 तक देश में 20 लाख 80 हजार नौकरियां घटेंगी। हालांकि इस कड़वे सच को ढकने के लिए सरकार ने पिछले आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी बताया है कि मंदी के बादल छाने के बावजूद 2009 से रोजगार की स्थिति में सुधार होता रहा है।
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जून 2011 की तुलना में जून 2012 में समग्र रोजगार में 6.94 लाख की वृद्धि हुई है। आर्थिक समीक्षा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में सूचना व प्रौद्योगिकी क्षेत्र और बीपीओ में सर्वाधिक 4 लाख 44 हजार नई नौकरियों का सृजन हुआ है। जबकि वस्त्र क्षेत्र में 1 लाख 70 हजार रोजगार, परिवहन क्षेत्र में 45 हजार, धातु क्षेत्र में 26 हजार, रत्न व आभूषण क्षेत्र में 19 हजार और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 11 हजार रोजगार के अवसर आए हैं।
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दूसरी ओर, हथकरघा और बिजली से चलने वाले करघे और चमड़ा क्षेत्र में रोजगार दर में गिरावट दर्ज की गई है। आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि जून 2011 की तुलना में जून 2012 में निर्यात आधारित इकाइयों में रोजगार के कुल स्तर में 5 लाख 81 हजार की वृद्धि हुई है। जबकि गैर निर्यात आधारित इकाइयों में यह वृद्धि 1 लाख 10 हजार की रही है।
मार्च-जून 2012 की तिमाही में रोजगार सिर्फ वस्त्र उद्योग समेत आईटी, बीपीओ क्षेत्र, रत्न आभूषण में रहा। चमड़ा, परिवहन, हथकरघा क्षेत्र में रोजगार दर में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जबकि धातु, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में यह नकारात्मक वृद्धि दर दर्ज की गई थी। इस तिमाही में समग्र रोजगार में एक फीसदी से भी कम इजाफा हुआ है।
दूसरी ओर, आंकड़े बताते हैं कि कम रोजगार वृद्धि के बावजूद 2004-05 में बेरोजगारी दर जहां 8.2 फीसदी थी वह 2009-10 में घटकर 6.6 फीसदी रह गई। याद रहे कि सर्वेक्षण में कहा गया है कि उद्योग नौकरियां तो सृजित कर रहे हैं लेकिन यह अपेक्षाकृत कम उत्पादकता परक नौकरियां हैं।
वर्ष 2011 में संगठित, सरकारी और निजी क्षेत्र की कुल रोजगार वृद्धि दर 1 फीसदी रही, जो कि 2010 में 1.9 फीसदी आंकी गई थी। 2011 में निजी क्षेत्र में रोजगार दर 5.6 फीसदी वार्षिक रही। लेकिन सरकारी क्षेत्र में यह नकारात्मक आंकी गई। महत्वपूर्ण यह है कि 2009-11 के बीच संगठित क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी करीब 20.5 फीसदी रही, जो कि हाल के वर्षों में भी इसी स्तर पर बरकरार है।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों की कोशिशों से औद्योगिक क्षेत्र में माहौल शांतिपूर्ण रहा है। वर्ष 2007 में जहां हड़ताल और तालाबंदी की 389 घटनाएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2012 अक्तूबर तक यह आंकड़ा घटकर 194 पर आ गया है।